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Solan News: सांस्कृतिक संध्या के बाद परिवहन व्यवस्था ठप, आधी रात को पैदल घर लौटने को मजबूर हुए लोग
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अतिरिक्त बसें न चलने से सांस्कृतिक संध्या के बाद दर्शकों को झेलनी पड़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। राष्ट्रीय स्तरीय मां शूलिनी मेले की सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेने पहुंचे लोगों के लिए रात को घर वापस लौटने में परेशानी झेलनी पड़ी है। प्रशासन और परिवहन निगम के दावों के विपरीत, सांस्कृतिक संध्या की समाप्ति के बाद लोगों के लिए अतिरिक्त बसों की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। आलम यह रहा कि आधी रात को पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को पैदल ही अपने घरों की ओर रुख करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय कुछ चुनिंदा रूटों पर ऑटो की व्यवस्था तो थी, लेकिन मेले में उमड़ी भारी भीड़ के आगे वह नाकाफी साबित हुई। ऑटो न मिलने के कारण अधिकतर लोगों को भारी निराशा झेलनी पड़ी और वे पैदल चलने को मजबूर हुए।
जानकारी के मुताबिक, दिन के समय मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए चंबाघाट की तरफ से मोहन पार्क तक बसों की सुविधा दी गई थी। वहीं, राजगढ़ की ओर से आने वाले लोगों को कोटलानाला चौक तक बसें मिल रही थीं, लेकिन रात 9:00 बजे के बाद प्रशासन और परिवहन निगम ने कोई भी अतिरिक्त बस नहीं चलाई। मेले की सांस्कृतिक संध्या को देखने के लिए सोलन शहर ही नहीं, बल्कि आस-पास के दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मेले के पहले ही दिन परिवहन व्यवस्था के इस तरह चरमरा जाने से आम जनता में भारी रोष है।
कोट
दिन के समय दो अतिरिक्त बसें कोठों तक चलाई गई थीं, लेकिन रात्रि के समय कोई अतिरिक्त बस नहीं चलाई गई। यदि आने वाले दिनों में रात के समय यात्रियों की संख्या अधिक रहती है, तो प्रशासन से तालमेल बिठाकर रात के लिए भी बसों का विशेष इंतजाम किया जाएगा।
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सुरेंद्र राजपूत, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। राष्ट्रीय स्तरीय मां शूलिनी मेले की सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेने पहुंचे लोगों के लिए रात को घर वापस लौटने में परेशानी झेलनी पड़ी है। प्रशासन और परिवहन निगम के दावों के विपरीत, सांस्कृतिक संध्या की समाप्ति के बाद लोगों के लिए अतिरिक्त बसों की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। आलम यह रहा कि आधी रात को पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को पैदल ही अपने घरों की ओर रुख करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, रात के समय कुछ चुनिंदा रूटों पर ऑटो की व्यवस्था तो थी, लेकिन मेले में उमड़ी भारी भीड़ के आगे वह नाकाफी साबित हुई। ऑटो न मिलने के कारण अधिकतर लोगों को भारी निराशा झेलनी पड़ी और वे पैदल चलने को मजबूर हुए।
जानकारी के मुताबिक, दिन के समय मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए चंबाघाट की तरफ से मोहन पार्क तक बसों की सुविधा दी गई थी। वहीं, राजगढ़ की ओर से आने वाले लोगों को कोटलानाला चौक तक बसें मिल रही थीं, लेकिन रात 9:00 बजे के बाद प्रशासन और परिवहन निगम ने कोई भी अतिरिक्त बस नहीं चलाई। मेले की सांस्कृतिक संध्या को देखने के लिए सोलन शहर ही नहीं, बल्कि आस-पास के दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। मेले के पहले ही दिन परिवहन व्यवस्था के इस तरह चरमरा जाने से आम जनता में भारी रोष है।
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दिन के समय दो अतिरिक्त बसें कोठों तक चलाई गई थीं, लेकिन रात्रि के समय कोई अतिरिक्त बस नहीं चलाई गई। यदि आने वाले दिनों में रात के समय यात्रियों की संख्या अधिक रहती है, तो प्रशासन से तालमेल बिठाकर रात के लिए भी बसों का विशेष इंतजाम किया जाएगा।
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सुरेंद्र राजपूत, क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी