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Solan News: मंडी में कौड़ियों के भाव बिक रहा टमाटर, किसान बेहाल
Mon, 03 Aug 2026 11:33 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Mon, 03 Aug 2026 11:33 PM IST
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नासिक और बेंगलुरु से टमाटर की भारी आवक से किसानों को नहीं मिल पा रहे अच्छे दाम
लागत दो गुने से अधिक होने से कई किसानों ने छोड़ी फसलों की देखरेख
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश के किसान इन दिनों टमाटर के गिरते दामों के कारण गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कड़ी मेहनत और भारी लागत के बाद तैयार हुई टमाटर की फसल अब किसानों की आंखों में आंसू ला रही है। स्थिति यह बन चुकी है कि सब्जी मंडी में टमाटर बेचने पर लागत निकालना तो दूर, फसलों पर किए जाने वाले कीटनाशक और फफूंदनाशक स्प्रे का खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है। आलम यह है कि आमदनी की तुलना में स्प्रे का खर्च दोगुना होने निराश किसानों ने फसलों की देखरेख करना और कीटनाशन डालना भी बंद कर दिया है।
सोलन सब्जी मंडी में इन दिनों टमाटर 4 रुपये से लेकर 14 रुपये प्रति किलोग्राम की बेहद कम दरों पर बिक रहा है। सिरमौर और सोलन जिले के हजारों किसानों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से टमाटर और शिमला मिर्च की खेती पर टिकी हुई है। लेकिन मौजूदा सीजन में मिल रहे दामों से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय किसान हरीदत्त, प्रेम चंद, देवी चंद, मनीष, राजेंद्र, देवदत्त और मनोज समेत कई अन्य उत्पादकों ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि बाजार में मिल रही कीमतों से खेत से मंडी तक माल पहुंचाने की मजदूरी और भाड़ा भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
इनसेट
बाहरी राज्यों से भारी आवक बनी मुख्य वजह
मंडी समिति सोलन के सचिव राघव सूद के अनुसार, सोलन सब्जी मंडी में अब तक टमाटर की लगभग 2,61,054 क्रेट पहुंच चुकी हैं। वर्तमान में भी मंडी में रोजाना औसतन 8,000 क्रेट टमाटर पहुंच रहा है। सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसानों को फसल के अच्छे दाम न मिलने का सबसे बड़ा कारण देश की अन्य बड़ी मंडियों, विशेषकर बेंगलुरु और नासिक से बाजार में आ रही टमाटर की भारी खेप है। बाहरी राज्यों से आपूर्ति अधिक होने के कारण हिमाचल के टमाटर की मांग और कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
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इनसेट
आर्थिक मंदी की चपेट में क्षेत्र के किसान
सोलन और सिरमौर जिलों को हिमाचल प्रदेश में लाल सोने की खेती का गढ़ माना जाता है। इस सीजन में टमाटर और शिमला मिर्च की फसल ही यहां के ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय का मुख्य जरिया होती है। हालांकि, बाजार में अप्रत्याशित मंदी के चलते किसानों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। यदि दामों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आगामी सीजन में किसान इस नकदी फसल से दूरी बना सकते हैं, जिसका सीधा असर क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
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लागत दो गुने से अधिक होने से कई किसानों ने छोड़ी फसलों की देखरेख
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश के किसान इन दिनों टमाटर के गिरते दामों के कारण गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कड़ी मेहनत और भारी लागत के बाद तैयार हुई टमाटर की फसल अब किसानों की आंखों में आंसू ला रही है। स्थिति यह बन चुकी है कि सब्जी मंडी में टमाटर बेचने पर लागत निकालना तो दूर, फसलों पर किए जाने वाले कीटनाशक और फफूंदनाशक स्प्रे का खर्च भी निकालना मुश्किल हो गया है। आलम यह है कि आमदनी की तुलना में स्प्रे का खर्च दोगुना होने निराश किसानों ने फसलों की देखरेख करना और कीटनाशन डालना भी बंद कर दिया है।
सोलन सब्जी मंडी में इन दिनों टमाटर 4 रुपये से लेकर 14 रुपये प्रति किलोग्राम की बेहद कम दरों पर बिक रहा है। सिरमौर और सोलन जिले के हजारों किसानों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से टमाटर और शिमला मिर्च की खेती पर टिकी हुई है। लेकिन मौजूदा सीजन में मिल रहे दामों से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय किसान हरीदत्त, प्रेम चंद, देवी चंद, मनीष, राजेंद्र, देवदत्त और मनोज समेत कई अन्य उत्पादकों ने अपना दुख साझा करते हुए बताया कि बाजार में मिल रही कीमतों से खेत से मंडी तक माल पहुंचाने की मजदूरी और भाड़ा भी पूरा नहीं हो पा रहा है।
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बाहरी राज्यों से भारी आवक बनी मुख्य वजह
मंडी समिति सोलन के सचिव राघव सूद के अनुसार, सोलन सब्जी मंडी में अब तक टमाटर की लगभग 2,61,054 क्रेट पहुंच चुकी हैं। वर्तमान में भी मंडी में रोजाना औसतन 8,000 क्रेट टमाटर पहुंच रहा है। सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसानों को फसल के अच्छे दाम न मिलने का सबसे बड़ा कारण देश की अन्य बड़ी मंडियों, विशेषकर बेंगलुरु और नासिक से बाजार में आ रही टमाटर की भारी खेप है। बाहरी राज्यों से आपूर्ति अधिक होने के कारण हिमाचल के टमाटर की मांग और कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
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आर्थिक मंदी की चपेट में क्षेत्र के किसान
सोलन और सिरमौर जिलों को हिमाचल प्रदेश में लाल सोने की खेती का गढ़ माना जाता है। इस सीजन में टमाटर और शिमला मिर्च की फसल ही यहां के ग्रामीण परिवारों की वार्षिक आय का मुख्य जरिया होती है। हालांकि, बाजार में अप्रत्याशित मंदी के चलते किसानों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है। यदि दामों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो आगामी सीजन में किसान इस नकदी फसल से दूरी बना सकते हैं, जिसका सीधा असर क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।