{"_id":"5824632a4f1c1bf47eb3a2d4","slug":"the-play-on-old-incident-in-solan","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों को मारकर मां के दूध की खीर खाता था दुराचारी राजा, इस तरह हुआ अंत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों को मारकर मां के दूध की खीर खाता था दुराचारी राजा, इस तरह हुआ अंत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Fri, 11 Nov 2016 12:05 AM IST
विज्ञापन
संस्कृत कॉलेज सोलन में प्राचीन घटना पर आधारित दुग्ध धेनु नाटक का मंचन करते कलाकार।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अत्याचार जब हद से ज्यादा बढ़ता है तो कोमल हाथ भी फौलादी बन जाते हैं। वहीं बात जब बच्चों को हो तो मां को शेरनी बनने में भी वक्त नहीं लगता। संस्कृत कॉलेज सोलन में प्राचीन घटना पर आधारित दुग्ध धेनु नाटक के मंचन के जरिये
विज्ञापन
कलाकारों ने कुछ ऐसा ही संदेश दिया। दुग्ध धेनु नाटक एक ऐसे राजा की कहानी है जो नवजात बच्चों को मारकर उनकी मां के दूध की खीर खाने का शौक रखता है। दुराचारी राजा अपने इस शौक के लिए कई घरों के चिराग बुझा देता है।
विज्ञापन
दुराचारी राजा का अत्याचार जब चरम पर पहुंचाता है तो कुछ साहसी महिलाएं हिरण के मुखौटों में छिपकर महल के अंदर ही अत्यचारी राजा का दराती से वध कर देती हैं। महिला शक्ति, एकजुटता और साहस का संदेश देने वाले इस नाटक का मंचन संस्कृत कॉलेज में बुधवार देर शाम किया गया।
विज्ञापन
बेहतर अभिनय और स्क्रीन प्ले ने इस नाटक ने कई मायनों में संदेश रूपी माहौल को सशक्त कर दिया। नाटक का मंचन जिला प्रशासन तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया। एक्टिव मोनाल कल्चरल ऐसोसिएशन कुल्लू द्वारा इस नाटय उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
नाचते-नाचते राजा का वध
केहर सिंह ठाकुर द्वारा लिखित एवं निर्देशित यह नाटक कुल्लू के एक दुराचारी राजा की कहानी है। राजा औरतों के दूध की खीर खाने का आदी था। वह अपने राज्य की सब गर्भवती औरतों को तहखाने में जमा करता है और प्रसव होते ही नवजात शिशु को मारकर उन औरतों के दूध की खीर खाता है।
कहानी के अंत में अत्यचारी राजा को सबक सिखाने और उसके द्वारा किए पापों की सजा देने के लिए महिलाएं नाटक का मंचन करती हैं। इसमें वह हिरण के मुखौटों में छिपकर नाचते-नाचते राजा के निकट जाती हैं और मौका पाते ही तेजधार वाली दरातियों से राजा का वध कर देती हैं।
ऐसी पड़ी राजा को खीर की आदत
राजा ने अपनी प्रजा को आदेश दिया था कि हर रोज एक घर से उसके लिए दूध से बनी खीर लाई जाए। एक दिन एक ऐसे परिवार की बारी आती है, जिसका मुखिया किसी काम के सिलसिले से घर से कहीं बाहर गया था। वहीं उसकी पत्नी ने कुछ दिन पहले ही एक बच्चे को जन्म दिया था।
राजा के आदेश का पालन करते हुए वह महिला अपने नवजात को घर में छोड़कर खीर देने महल पहुंची। लेकिन पहाड़ी रास्ता होने के चलते काफी दूध लोटे से गिर गया। डर के मारे महिला ने दूध पूरा करने के लिए अपना ही दूध लोटे में मिला दिया। राजा ने जब खीर चखी तो उसे उसका स्वाद बहुत अच्छा लगा। महिला को महल में बुलाकर जब इसका राज जाना तो राजा ने आदेश जारी कर दिए कि वह अब सिर्फ महिलाओं के दूध की ही खीर खाएगा। इसके बाद वह बच्चों को मारना शुरू कर दिया जाता है।
इन कलाकारों ने बटोरी वाहवाही
शहर के नाटक प्रेमी बड़ी संख्या में संस्कृत कॉलेज परिसर पहुंच रहे हैं। नाटकों को खूब पसंद किया जा रहा है। नाटक में नरेश, मीनाक्षी, आरत ठाकुर, आशा, रेखा, कविता, युक्ति, जीवानंद, दीनदयाल, श्याम, ओम प्रकाश और वैभव ठाकुर समेत कई कलाकारों ने मंच पर अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन किया। प्रकाश संचालन रेवत राम, विक्की तथा ध्वनि संचालन सीता ने किया।