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मुद्रिका बसें बंद करने पर लोग लामबंद, आंदोलन की धमकी
ब्यूरो, सोलन
Updated Tue, 22 Nov 2016 07:36 AM IST
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निजी मुद्रिका बसें बंद करने को लेकर शहर के लोग लामबंद हो गए हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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निजी मुद्रिका बसें बंद करने को लेकर शहर के लोग लामबंद हो गए हैं। लोगों का कहना है कि बसें बंद होने से ऑटो की सवारी रोजाना 26 रुपये तक लोगों को महंगी पड़ रही है। वहीं ऑटो संचालकों की ओवरलोडिंग और मनमर्जी से छूटा न देकर 10 रुपये काटने से भी यात्री परेशान हैं।
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प्रशासन द्वारा शहर के आम नागरिकों को राहत देेने के मकसद से निजी मुद्रिका बस सेवा शुरू की थी लेकिन यह बसें बंद होने से रोजाना शहर में सफर करने वाले यात्रियों की जेब कट रही है। लेकिन प्रशासन मूक दर्शक बने बैठा है। सोमवार को निजी मुद्रिका बसों को दोबारा शहर में चलाने और ऑटो चालकों की मनमर्जी पर शिकंजा कसने लेकर लोगों ने प्रतिनिधिमंडल जिला और पुलिस प्रशासन से मिला।
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लोगों का कहना है कि एक तो ऑटों वाले ओवरलोडिंग कर 8-8 सवारियों को एकसाथ बिठा रहे हैं वहीं ज्यादा पैसे भी वसूल रहे हैं। इसे रोकने में पुलिस प्रशासन विफल है। इस पर प्रशासन को रोक लगनी चाहिए। यदि जल्द मांगें न मानी तो लोग
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डीसी सोलन के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे और लोग आंदोलन के रूप में प्रशासन से मांगें मनवाने का प्रयास करेंगे। वहीं डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि जल्द ही बैठक कर बसों को शुुरू करने का फैसला लिया जाएगा। लोगों की समस्याओं को प्रशासन प्राथमिकता के आधार पर हल करेगी।
यह था मामला
ऑटो यूनियन के किराया बढ़ाने के बाद छिड़े विवाद पर और शहर में आटो यूनियन की हड़ताल के बाद प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए कम किराये पर निजी मुद्रिका बसों को चलाने के आदेश जारी किए। इससे आम लोगों को ऑटो चालकों की मनमानी से निजात तो मिली ही साथ ही रोजाना निर्धारित रूटों पर किए जाने वाला सफर भी सस्ता और आरामदायक हो गया।
लेकिन निजी बसों को बिना सूचना के बंद कर दिया। अब प्रशासन भी मूक दर्शक बने बैठे लोगों की जेब कटती दिख रहा है। शहर में मुद्रिका बसें चलाने के लिए प्रशासन कोई कदम नहीं उठा रहा है। हालांकि मामले को लेकर आटो संचालक कोर्ट में हैं। लेकिन कोर्ट से बसें बंद करने के कोई निर्देश नहीं हैं।
मुद्रिका बसें न चलने से है यह प्रभाव
मुद्रिका बसें नहीं चलने से शहर में एक बार फिर ऑटो चालक ओवरलोडिंग और ओरव चार्जिंग कर रहे हैं। बसें बंद होने को लेकर शहरवासियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और विद्यार्थियों में बसें बंद होने के चलते लोगों में रोष है।
लोगों का कहना है कि आंजी, रबौण, चंबाघाट, कोटलानाल से बस सेवा बंद होने के बाद उन्हें महंगा सफर करना पड़ रहा है। इससे बजट तो बिगड़ गया है, साथ ही सफर भी आरामदायक नहीं है। शहर में एचआरटीसी नियमित बसों के अलावा अतिरिक्त मुद्रिका बसें भी चल रही हैं लेकिन इन के शहर में रूट कम होने के चलते शहरवासियों को कोई खास फायदा नहीं मिल रहा। जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण आम जनता को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
स्थान आटो किराया बस किराया प्रति दिन नुकसान आना/जाना आना/जाना आंजी/रबौन से बस स्टेंड 36 रुपये 10 रुपये 26 रुपये बस स्टैंड से चंबाघाट 16 रुपये 06 रुपये 10 रुपये शामती से डीसी चौक 26 रुपये 10 रुपये 16 रुपये सपरूण से तारफेक्ट्री 20रूपए ----- -----------------------
इन रूट पर थीं बस सेवाएं
निर्देशों के अनुसार मैर्सज पीआरएल ट्रांसपोर्टर शामती को शामती-सपरून-रबौन, मैर्सज मेहता ट्रांसपोर्ट कोआपरेटिव सोसायटी शामती को शामती-सपरून-रबौन तथा चंबाघाट-उपायुक्त कार्यालय चौक-सपरून तथा मैर्सज भगनाल ट्रांसपोर्ट कोटलानाला को सपरून-उपायुक्त कार्यालय चौक-चंबाघाट मार्ग पर मुद्रिका बस सेवा आरंभ की थी।
ऑटो के लिए करना पड़ता है इंतजार
वरिष्ठ नागरिकों में आरसी गर्ग, शैलेंद्र पंवर, बिशेषरनाथ, जीडी भारद्वाज, एसके नैय्यर, सुरेश दत्ता, बीएन शर्मा, डॉ. एससी तिवारी, डॉ. आरके पठानिया, प्रो. यूएन खौसला और शशिकांत ने बसों को दोबारा चलाने की मांग की है। कहा कि अगर बंद ही करनी थी तो प्रशासन ने बस सेवा आरंभ ही क्यों की। बसे जहां हर 15 मिनट में मिल जाया करती थीं वहीं ऑटो के लिए लंबा इंतजार करने पर भी एकसाथ कई सवारियों को बिठाया जाता है। इससे सफर मुश्किलों भरा होता है।
बसें चलाए प्रशासन नहीं तो करेंगे प्रदर्शन
पुलिस और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने वालों में रमन प्रिमटा, अनिल कुमार, राजेंद्र ठाकुर, लायकराम ठाकुर, राजीव त्यागी, अमित कुमार, विक्रम वर्मा, आशीष ठाकुर, कल्पना नेगी, रोहित वर्मा, देबू चौहान, अजय शर्मा, तरूण भारद्वाज, अजय भारद्वाज शामिल रहे। ज्ञापन में जिला उपायुक्त से जल्द इन निजी बसों को फिर से चलाए जाने की मांग की है। इससे आटो चालकों की मनमानी पर रोक लगाई जा सके। अन्यथा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
अमर उजाला ने उठाया था मामला
प्रदेश के नंबर वन अखबार अमर उजाला ने निजी मुद्रिका बस सेवा बंद होने की न्यूज को प्रमुखता से उठाया था। बसों के बंद होने से लोगों को पेश आ रही दिक्कतों को प्रकाशित किया था। ओवरलोडिंग, ओवरचार्जिंग को लेकर आ रही शिकायतों को भी प्रशासन के साथ सांझा किया गया।