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अर्की अस्पताल के हाल : गर्भवतियों को शिमला, किडनी मरीज किए जा रहे पीजीआई रेफर

Sun, 28 Jun 2026 01:06 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2026 01:06 AM IST
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State of Arki Hospital: Pregnant women being referred to Shimla; kidney patients being sent to PGI.
सीएचसी अर्की। अ​भियान के साथ फोटो
-अभियान-7
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12 साल पुरानी मशीन से हो रहे अल्ट्रासाउंड, अस्पताल में हर रोज इलाज के लिए पहुंचते हैं 400 मरीज
डेढ़ लाख आबादी को झेलनी पड़ रही दिक्कतें
योगेश शर्मा
अर्की (सोलन)। डेढ़ लाख आबादी वाले अर्की विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। नागरिक अस्पताल अर्की में 12 साल पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीन से काम चलाया जा रहा है। रंगीन अल्ट्रासाउंड और डायलिसिस जैसी जरूरी सुविधाएं न होने से गर्भवती महिलाओं से लेकर किडनी मरीजों तक को इलाज के लिए बार-बार शिमला, सोलन, बिलासपुर और चंडीगढ़ के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हाल ही में ऑपरेशन के बाद रेफर की गई महिला की मौत और मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए भटकते परिवार ने भी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नागरिक चिकित्सालय में करीब 400 के करीब ओपीडी रहती है, जिसमें ढाई सौ से ज्यादा गर्भवती महिलाएं चेकअप के लिए आती हैं। यहां पिछले 12 सालों से अल्ट्रासाउंड की पुरानी मशीन काम कर रही है। रंगीन फिल्म लेने के लिए लोगों को शिमला सोलन के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। महिलाओं की डिलीवरी यहां होती है, जबकि कलर्ड अल्ट्रासाउंड न होने के चलते अधिकतर महिलाओं को अन्य जगह जाना पड़ता है।हाल ही में पथरी के ऑपरेशन के बाद शिमला रेफर एक महिला की मौत हो गई थी जिसके बाद अर्की अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर खूब सवाल उठे थे। दोनों अस्पताल महिला की मौत से पल्ला झाड़ते रहे। अर्की अस्पताल का कहना था कि उन्होंने महिला को जीवित रेफर किया था जबकि आईजीएमसी शिमला का तर्क था कि महिला की मौत अस्पताल पहुंचने से काफी पहले हो चुकी थी। यहां तक कि मृतक का पति मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए अभी तक चक्कर काट रहा है।
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हालांकि विभाग की ओर से करीब डेढ करोड रुपये की लागत से अस्पताल के अलग-अलग विभागों के लिए मशीने खरीदी जा रही हैं,जिसमें कलर्ड अल्ट्रासाउंड मशीन भी शामिल है, लेकिन कब तक आएगी अभी तक इसकी स्थिति साफ नहीं है। विधानसभा क्षेत्र की करीब डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है। क्षेत्र में दो बड़ी सीमेंट कंपनियों के कारण यहां धूल मिट्टी के गुब्बार अकसर रहते हैं! जिस कारण शवास तथा किडनी रोगियों के अलावा पत्थरी रोग के रोगियों की संख्या मे इजाफा हो रहा। किडनी रोग से संबंधित लोगों को डायलिसिस के लिए को शिमला के आईजीएमसी या पीजीआई चंडीगढ़ के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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केस-1
भूमति गांव की वनिता ने बताया कि एक माह पूर्व जब वह गर्भवती थी तो वह अल्ट्रासाउंड के लिए अर्की अस्पताल में आई थी, अल्ट्रासाउंड की मशीन पुरानी होने और कलर्ड न होने के चलते उन्हें शिमला जाना पड़ा। यही नहीं इस दौरान महीने में उन्हें दो बार उन्हें शिमला के चक्कर काटने पड़े।

केस-2
दानोंघाट की रीता ने बताया कि गर्भवती के दौरान उनके बच्चे के अंग विकसित नहीं हो रहे थे, जिस कारण चिकित्सकों ने उन्हें रंगीन अल्ट्रासाउंड करने की सलाह दी थी, जिसके चलते उन्हें सोलन तथा एम्स बिलासपुर के चक्कर लगाने पड़े थे।

कोट
अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। जल्द ही अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन आ जाएगी, जिसके बाद गर्भवती महिलाओं समेत अन्य मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। जल्द ही अर्की में डायलिसिस की सुविधा भी मिल जाएगी।
मुक्ता रस्तोगी, बीएमओ, अर्की
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