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चिड़िया ने खोली समाज में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार की पोल
ब्यूरो, सोलन
Updated Fri, 11 Nov 2016 09:43 PM IST
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चिड़िया के बहाने नाटक के जरिये कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से समाज में फैले भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को उजागर किया।
- फोटो : अमर उजाला
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चिड़िया के बहाने नाटक के जरिये कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय से समाज में फैले भ्रष्टाचार और अव्यवस्था को उजागर किया। नाटक में एक ऐसी चिड़िया की कहानी है जो अपने खोए हुए मटर के दाने को ढूंढने के लिए सिपाही से लेकर राजा तक से गुहार लगाती है। लेकिन उसकी कोई नहीं सुनता। अंत में वह अपनी बुद्धि और कौशल के सहारे राजा के हाथों से ही अपने खोए हुए मटर के दाने को हासिल करती है। कहानी समाज में फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को उजागर करती है।
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संस्कृत कॉलेज सोलन में देर शाम इस नाटक का मंचन किया गया। बेहतर कहानी, अभिनय और स्क्रीन प्ले वाले इस नाटक को दर्शकों ने खूब पसंद किया। जिला प्रशासन तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस नाट्य उत्सव के दूसरे दिन डीसी. डॉ राकेश कंवर ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन कुल्लू के कलाकारों ने नाटक का मंचन किया।
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यह है नाटक की कहानी
दूसरे देश से आई चिड़िया का एक मटर का दाना बढ़ई ठेकेदार से गुम हो जाता है। इसकी शिकायत चिड़िया सिपाही से करती है। लेकिन सिपाही उसे यह कहकर हड़का देता है कि उसका काम मटर का दाना ढूंढना नहीं है। बल्कि उसका काम तो देश में कानून और शांति बनाए रखना है। इसके बाद वह थानेदार के पास जाती है तो थानेदार कहता है कि पुलिस का काम मटर का दाना ढूंढना नहीं है। मंत्री जी आ रहे हैं मुझे उनकी व्यवस्था करनी है। वह मंत्री के पास जाती है तो वह कहता है कि राजा साहब आने वाले हैं। मुझे उनकी व्यवस्था करनी है। नहीं तो मेरे मंत्री पद पर गाज गिर सकती है। अंत में राजा से हिम्मत करके चिड़िया गुहार लगाती है तो राजा कहता है घमंडी चिड़िया तेरी यह हिम्मत कि तू देश के एक राजा से मटर का दाना ढूंढने को कह रही है। इसके साथ ही चिड़िया समझ जाती है कि ऐसे काम नहीं चलेगा।
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फिर यूं मिला खोया मटर का दाना
गुम मटर के दानों को पाने के लिए चिड़िया एक चींटी से मदद लेती हैं। चींटी राजा के घोड़े को जानती थी। वह उस घोड़े से कहती है कि अगर वह अपने राजा को चिड़िया की मदद करने को राजी नहीं करेगा तो वह उसके नाक में घुसकर उसे परेशान करेगी। डर के मारे घोड़ा राजा को सारी बात बता देता है। साथ ही उसे चिड़िया की मदद करने के लिए राजी कर देता है। इसके बाद राजा अपने मंत्री को आदेश देता है कि चिड़िया का मटर का दाना जल्द ढूंढा जाए। मंत्री, थानेदार और सिपाही को मटर को ढूंढने के कार्य में लगाया जाता है। सिपाही तुरंत दाना ढूंढ लेता है और राजा को सौंप देता है। राजा चिड़िया को महल में बुलाकर उसका खोया हुआ मटर का दाना उसे वापस देता है।
नाटक में इन्होंने किया अभिनय
केहर सिंह ठाकुर द्वारा लिखित एवं निर्देशित इस नाटक में आरती ठाकुर, केहर सिंह ठाकुर, जीवानंद, दीनदयाल, आशा, रेवतराम, विक्की, श्याम, ओम प्रकाश, कविता, सीता, रेखा और भूषण देव ने अभिनय किया। पार्श्व संगीत युक्ति ने किया। आलोक, वैभव ठाकुर और मीनाक्षी ने भी सहयोग किया।