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सुबाथू में मौत के 12 साल बाद भी नहीं हुआ प्रोविडेंट फंड का भुगतान
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सुबाथू (सोलन)। छावनी परिषद सुबाथू में डाक विभाग पर धारक की मृत्यु बाद किए आवेदन के 12 साल बाद भी पंजीकृत वसीयत के आधार पर लाभार्थी पुत्र को पब्लिक प्रोविडेंट फंड की राशि का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है।
पीड़ित के अनुसार उनके पिता मदन गोपाल की मृत्यु नवंबर 2007 में हो गई थी। मृतक व्यक्ति ने डाक विभाग की पब्लिक प्रोविडेंट फंड योजना में निवेश किया था। पंजीकृत वसीयत के आधार पर योजना की लाभ राशि के हकदार मृतक के छोटे पुत्र दिनेश गुप्ता ने डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि पिता की मृत्यु के कुछ समय बाद वर्ष 2009 में उन्होंने पब्लिक प्रोविडेंट फंड की लाभ राशि के लिए आवेदन किया।
उन्होंने सब रजिस्ट्रार (तहसीलदार) सोलन से पंजीकृत वसीयत की प्रतिलिपि भी भेजी थी। डाक विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए दस्तावेजों को लौटा दिया कि भेजे गए दस्तावेजों में उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र, प्रशासन पत्र या वसीयत की परीविक्षा (प्रोबेट) में से एक दस्तावेज होना आवश्यक है।
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दिनेश ने बताया कि जब डाक विभाग ने 2009 में दावे के दस्तावेजों को लौटाया था, तब उन्होंने प्रोविडेंट फंड के दस्तावेजों के साथ अधिनियम और कोर्ट के फैसले की प्रतिलिपि भी डाक विभाग को भेजी लेकिन अभी तक उन्हें राशि अदा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों के बाद भी डाक विभाग लीगल ओपिनियन मांग रहा है।
डाक सेवा, हिमाचल वृत्त के निदेशक दिनेश कुमार मिस्त्री ने डाक सेवा सोलन के अधीक्षक से बात की। वहीं, अधीक्षक डाक सेवा सोलन रतन चंद ने बताया कि डाक विभाग ने जिला न्यायवादी से इस बारे में राय मांगी है। इसके बाद मामले पर अगला फैसला लिया जाएगा।
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पीड़ित के अनुसार उनके पिता मदन गोपाल की मृत्यु नवंबर 2007 में हो गई थी। मृतक व्यक्ति ने डाक विभाग की पब्लिक प्रोविडेंट फंड योजना में निवेश किया था। पंजीकृत वसीयत के आधार पर योजना की लाभ राशि के हकदार मृतक के छोटे पुत्र दिनेश गुप्ता ने डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि पिता की मृत्यु के कुछ समय बाद वर्ष 2009 में उन्होंने पब्लिक प्रोविडेंट फंड की लाभ राशि के लिए आवेदन किया।
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उन्होंने सब रजिस्ट्रार (तहसीलदार) सोलन से पंजीकृत वसीयत की प्रतिलिपि भी भेजी थी। डाक विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए दस्तावेजों को लौटा दिया कि भेजे गए दस्तावेजों में उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र, प्रशासन पत्र या वसीयत की परीविक्षा (प्रोबेट) में से एक दस्तावेज होना आवश्यक है।
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दिनेश ने बताया कि जब डाक विभाग ने 2009 में दावे के दस्तावेजों को लौटाया था, तब उन्होंने प्रोविडेंट फंड के दस्तावेजों के साथ अधिनियम और कोर्ट के फैसले की प्रतिलिपि भी डाक विभाग को भेजी लेकिन अभी तक उन्हें राशि अदा नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेशों के बाद भी डाक विभाग लीगल ओपिनियन मांग रहा है।
डाक सेवा, हिमाचल वृत्त के निदेशक दिनेश कुमार मिस्त्री ने डाक सेवा सोलन के अधीक्षक से बात की। वहीं, अधीक्षक डाक सेवा सोलन रतन चंद ने बताया कि डाक विभाग ने जिला न्यायवादी से इस बारे में राय मांगी है। इसके बाद मामले पर अगला फैसला लिया जाएगा।