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प्रदेश में हिंदी के बाद पंजाबी भाषा को दें दूसरी भाषा का दर्जा
ब्यूरो, नालागढ़ सोलन
Updated Tue, 28 Jun 2016 10:31 PM IST
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सिक्ख स्टूडेंट फेडरेशन की प्रदेश इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य अध्यक्ष सतनाम सिंह की अगुवाई में पंजाबी भाषा को दूसरी भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर सीएम से शिमला में मुलाकात की।
- फोटो : अमर उजाला
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सिक्ख स्टूडेंट फेडरेशन की प्रदेश इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य अध्यक्ष सतनाम सिंह की अगुवाई में पंजाबी भाषा को दूसरी भाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर सीएम से शिमला में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सीएम को बताया कि फेडरेशन सिक्ख समुदाय की समस्याओं और उनके उत्थान के लिए प्रयासरत हैं। पंजाबी भाषा को देश और विदेशों में प्रचार-प्रसार करने का कार्य कर रहा हैै।
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हिमाचल का बड़ा हिस्सा पहले पंजाब में शामिल रहा है। काफी संख्या में लोग पंजाबी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। प्रतिनिधिमंडल में सिक्ख स्टूडेंट फेडरेशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी सरदार भूपिंद्र सिंह बजरूड़, सिक्ख स्टूडेंट फेडरेशन के प्रदेशाध्यक्ष सतनाम सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह मंगा और कुलवंत सिंह, सचिव बलजिंद्र सिंह, मुख्य सलाहकार डॉ. अमरीक सिंह, जिला प्रधान हिम्मत सिंह राजा, बाबा सतपाल सिंह, नालागढ़ इकाई के प्रधान भूपिंद्र सिंह, दर्शन सिंह, मलकीत सिंह, सुदर्शन कुमार, हुकम पाल सिंह, अधिवक्ता हरप्रीत सिंह, कमल जीत सिंह बैंस और जोगिंद्र सिंह शामिल रहे।
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पंजाबी पढ़ाने के आदेश हों सख्त
फेडरेशन ने कहा कि प्रदेश में विकास में योगदान पाने के लिए यह जरूरी है कि पंजाबी भाषा को प्रदेश में दूसरी भाषा दर्जा दिया जाए। प्रदेश सरकार की ओर से जारी पंजाबी पढ़ाने के आदेश भी सख्ती से लागू किए जाएं। कई स्थानों पर पंजाबी पढ़ाने के आदेश सख्ती से लागू नहीं हो रहे हैं। सीमांत क्षेत्रों में अधिक स्कूलों में पंजाबी पढ़ाने की मांग की गई।
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गलत तरीके से प्रमाण पत्र पर कसें शिकंजा
मुख्यमंत्री से मांग की है कि बिना केश वाले लोगों के समुदाय के प्रमाणपत्र न बनाए जाएं। गलत तरीके से प्रमाणपत्र बना रहे हैं तो उन पर सरकार सख्ती से कार्रवाई करें। संघ का कहना है कि कई लोग गलत तरीके से प्रमाणपत्र बनाने में जुटे हैं। ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।