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जागरूकता: हिमाचल प्रदेश में चलेगा खेत बचाओ अभियान, असली-नकली कीटनाशकों की पहचान बताएंगे विशेषज्ञ
Tue, 02 Jun 2026 01:14 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:14 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में 1 से लेकर 30 जून तक कृषि और निदेशालय खुंब अनुसंधान के वैज्ञानिक लगातार फील्ड में रहेंगे। वैज्ञानिक खुद खेतों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे और उन्हें जागरूक करेंगे। अभियान के दौरान वैज्ञानिक किसानों को असली और नकली पेस्टीसाइड की पहचान करने के व्यावहारिक टिप्स देंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
केंद्र सरकार की ओर से शुरू किए गए खेत बचाओ अभियान के तहत देश के साथ प्रदेश के किसानों को आधुनिक और सही तरीके से खेती करने के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे। इस विशेष अभियान के तहत 1 से लेकर 30 जून तक कृषि और निदेशालय खुंब अनुसंधान के वैज्ञानिक लगातार फील्ड में रहेंगे। वैज्ञानिक खुद खेतों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे और उन्हें जागरूक करेंगे।
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इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों से बचाना है। अक्सर बाजार में मिलने वाले नकली कीटनाशकों (पेस्टीसाइड) के कारण किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। अभियान के दौरान वैज्ञानिक किसानों को असली और नकली पेस्टीसाइड की पहचान करने के व्यावहारिक टिप्स देंगे।
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उधर, डीएमआर के कार्यकारी अतिरिक्त निदेशक डॉ. बीएल अत्री ने बताया कि केंद्र सरकार के इस अभियान में विशेषज्ञों की टीम सीधे खेतों का रुख करेगी। अभियान के दौरान मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें खेतों में कितनी और किस अनुपात में खाद डालनी चाहिए, इसकी सटीक जानकारी दी जाएगी।
संतुलित खाद का उपयोग करने और रासायनिक खादों का प्रयोग कम से कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर देने को कहा जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपनी मर्जी या बाजार के बहकावे में आकर रसायनों का इस्तेमाल न करें, बल्कि हमेशा कृषि विशेषज्ञों की राय पर ही खेती करें। यह अभियान किसानों की आय बढ़ाने और उनकी लागत को कम करने में एक बड़ा मददगार साबित होगा।
संतुलित खाद का उपयोग करने और रासायनिक खादों का प्रयोग कम से कम करने के लिए प्रेरित किया जाएगा, किसानों को पारंपरिक और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर देने को कहा जाएगा। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे अपनी मर्जी या बाजार के बहकावे में आकर रसायनों का इस्तेमाल न करें, बल्कि हमेशा कृषि विशेषज्ञों की राय पर ही खेती करें। यह अभियान किसानों की आय बढ़ाने और उनकी लागत को कम करने में एक बड़ा मददगार साबित होगा।
नकली उर्वरकों एवं कीटनाशकों से सतर्क रहने की सलाह
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला में किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई। इसका आरंभ कार्यवाहक निदेशक डॉ. जगदेव शर्मा ने किया। शिमला जिले के डोमेहर गांव में वैज्ञानिक डॉ. सोम दत्त, डॉ. कैलाश नागा एवं डॉ. मनीषा ने किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और उसके लाभों के बारे में जानकारी दी।
केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) शिमला में किसानों के बीच मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, प्राकृतिक खेती तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की गई। इसका आरंभ कार्यवाहक निदेशक डॉ. जगदेव शर्मा ने किया। शिमला जिले के डोमेहर गांव में वैज्ञानिक डॉ. सोम दत्त, डॉ. कैलाश नागा एवं डॉ. मनीषा ने किसानों को प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों और उसके लाभों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को नकली उर्वरकों एवं कीटनाशकों से सतर्क रहने की सलाह देते हुए सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। सामाजिक विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि अभियान के अंतर्गत किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, हरी खाद तथा जैविक एवं जैव-आधारित कृषि आदानों के उपयोग संबंधी प्रशिक्षण प्रदान कर उनकी क्षमता विकसित की जाएगी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पिनबियांगलांग ने बताया कि इसी दिन डीपीएस रानीपुर, हरिद्वार (उत्तराखंड) तथा एसवीबी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन आईजीकेवी दुर्ग (छत्तीसगढ़) के 150 विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों ने संस्थान का भ्रमण किया। तकनीकी अधिकारी धर्मेंद्र गुप्ता ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।