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Solan News: प्रशिक्षुओं को बताई सत्यनारायण कथा व रामचरितमानस पाठ की विधि
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बथालंग में तीन दिवसीय पौरोहित्य एवं कर्मकांड शिविर का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अर्की (सोलन)। सप्तस्थान मंदिर परिसर बथालंग में पौरोहित्य एवं कर्मकांड शिबिर तीन दिवसीय शिविर का समापन हो गया। शिविर में तीन दिनों तक क्षेत्र के अनेक अंगों का प्रयोगात्मक अध्ययन किया। शिविर संयोजक कमलकांत गौतम ने बताया कि प्रथम दिवस उद्घाटन सत्र में पूर्व प्राचार्य एवं प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य मदनमोहन शर्मा ने पूजन, आचरण एवं पौराणिक महत्त्व का विषय बताया। इसके उपरांत आचार्य ललित शर्मा ने संध्या विधि को बताया। अंतिम सत्र में संस्कृत संभाषण करवाया गया। द्वितीय दिवस प्रातः काल आचार्य ललित ने संध्या के प्रायोगिक को करवाया। उन्होंने श्राद्ध चर्चा शौच अशौच व्यवस्था, विवाह और सत्यनारायण कथा सहित रामचरितमानस पाठ की विधि को बताया। उसके उपरांत राजकीय संस्कृत महाविद्यालय तुंगेश, शिमला के प्राचार्य डॉ. रमेश शर्मा ने ज्योतिष के गणित एवं फलित पक्ष को समझाया। उन्होंने पंचांग विज्ञान, मुहूर्त निकालना कुंडली निर्माण विधि को समझाया। इसी दिन सांयकाल डॉ रमेश ने फलित ज्योतिष से संबंधित प्रशिक्षुओं की समस्याओं का समाधान भी किया। अंतिम सत्र में आचार्य जगतप्रसाद शास्त्री ने सामान्य व्यवहार तथा पुरोहित के कर्म सिद्धांत के विषय को बताया। इस शिविर के अंतिम दिन प्रातः सत्र में आचार्य महेश्वरदत्त शर्मा ने वैदिक मंत्र का सस्वर वाचन सिखलाया। इसके उपरांत उन्होने पुरुष सूक्त एवं श्रीसूक्त का वाचन सिखाकर घनपाठ क्रम का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। आचार्य ललित शर्मा ने कुशकंडिका के प्रयोग को सभी प्रशिक्षुओं के समक्ष प्रत्यक्षतया समझाया। समापन में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं पूर्व अकादमी सचिव डॉ. मस्तराम शर्मा ने शिरकत की। उन्होंने अपने उद्बोधन में ज्योतिष का सामान्य ज्ञान और वैदिक गणित विषय को समझाया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अर्की (सोलन)। सप्तस्थान मंदिर परिसर बथालंग में पौरोहित्य एवं कर्मकांड शिबिर तीन दिवसीय शिविर का समापन हो गया। शिविर में तीन दिनों तक क्षेत्र के अनेक अंगों का प्रयोगात्मक अध्ययन किया। शिविर संयोजक कमलकांत गौतम ने बताया कि प्रथम दिवस उद्घाटन सत्र में पूर्व प्राचार्य एवं प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य मदनमोहन शर्मा ने पूजन, आचरण एवं पौराणिक महत्त्व का विषय बताया। इसके उपरांत आचार्य ललित शर्मा ने संध्या विधि को बताया। अंतिम सत्र में संस्कृत संभाषण करवाया गया। द्वितीय दिवस प्रातः काल आचार्य ललित ने संध्या के प्रायोगिक को करवाया। उन्होंने श्राद्ध चर्चा शौच अशौच व्यवस्था, विवाह और सत्यनारायण कथा सहित रामचरितमानस पाठ की विधि को बताया। उसके उपरांत राजकीय संस्कृत महाविद्यालय तुंगेश, शिमला के प्राचार्य डॉ. रमेश शर्मा ने ज्योतिष के गणित एवं फलित पक्ष को समझाया। उन्होंने पंचांग विज्ञान, मुहूर्त निकालना कुंडली निर्माण विधि को समझाया। इसी दिन सांयकाल डॉ रमेश ने फलित ज्योतिष से संबंधित प्रशिक्षुओं की समस्याओं का समाधान भी किया। अंतिम सत्र में आचार्य जगतप्रसाद शास्त्री ने सामान्य व्यवहार तथा पुरोहित के कर्म सिद्धांत के विषय को बताया। इस शिविर के अंतिम दिन प्रातः सत्र में आचार्य महेश्वरदत्त शर्मा ने वैदिक मंत्र का सस्वर वाचन सिखलाया। इसके उपरांत उन्होने पुरुष सूक्त एवं श्रीसूक्त का वाचन सिखाकर घनपाठ क्रम का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। आचार्य ललित शर्मा ने कुशकंडिका के प्रयोग को सभी प्रशिक्षुओं के समक्ष प्रत्यक्षतया समझाया। समापन में प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं पूर्व अकादमी सचिव डॉ. मस्तराम शर्मा ने शिरकत की। उन्होंने अपने उद्बोधन में ज्योतिष का सामान्य ज्ञान और वैदिक गणित विषय को समझाया।