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जीवन का मार्गदर्शन करने वाला ग्रंथ है रामायण : डॉ. धरणीधर
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बद्दी के वार्ड-9 स्थित बसंती बाग में सुनाई श्रीराम के चरित्र की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। नगर निगम के वार्ड-09 के बसंती बाग आवासीय कॉलोनी बद्दी में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन अयोध्या धाम के सुप्रसिद्ध प्रवक्ता डॉ. धरणीधर ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीराम का अयोध्या में जन्म केवल ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह मानव समाज को आदर्श चरित्र का संदेश देने वाला एक दिव्य प्रसंग है।
उन्होंने कहा कि चित्र बनाने वाले लोग संसार को धोखा दे सकते हैं, लेकिन चरित्र बनाने वाले व्यक्ति पर पूरा समाज विश्वास करता है। निर्गुण और निराकार भगवान सगुण और साकार रूप में क्यों प्रकट हुए, इसका मुख्य कारण राजा मनु और शतरूपा की कठोर तपस्या थी। उन्होंने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने की कामना की थी। डॉ. धरणीधर महाराज ने कथा में श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि महाराज दशरथ ने गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ के दौरान अग्निदेव खीर लेकर प्रकट हुए, जिसे ग्रहण करने के बाद माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। इस अवसर समिति सदस्य हंस आनंद , डॉ. बाबूलाल यादव, संजय चौरसिया, यश के पाण्डेय, राजेश पाण्डेय, मनीष भारद्वाज, संजीव तायल, निशा तायल, रंजीत श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। नगर निगम के वार्ड-09 के बसंती बाग आवासीय कॉलोनी बद्दी में आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन अयोध्या धाम के सुप्रसिद्ध प्रवक्ता डॉ. धरणीधर ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान श्रीराम का अयोध्या में जन्म केवल ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह मानव समाज को आदर्श चरित्र का संदेश देने वाला एक दिव्य प्रसंग है।
उन्होंने कहा कि चित्र बनाने वाले लोग संसार को धोखा दे सकते हैं, लेकिन चरित्र बनाने वाले व्यक्ति पर पूरा समाज विश्वास करता है। निर्गुण और निराकार भगवान सगुण और साकार रूप में क्यों प्रकट हुए, इसका मुख्य कारण राजा मनु और शतरूपा की कठोर तपस्या थी। उन्होंने भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने की कामना की थी। डॉ. धरणीधर महाराज ने कथा में श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया गया कि महाराज दशरथ ने गुरु वशिष्ठ के मार्गदर्शन में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ के दौरान अग्निदेव खीर लेकर प्रकट हुए, जिसे ग्रहण करने के बाद माता कौशल्या के गर्भ से भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। इस अवसर समिति सदस्य हंस आनंद , डॉ. बाबूलाल यादव, संजय चौरसिया, यश के पाण्डेय, राजेश पाण्डेय, मनीष भारद्वाज, संजीव तायल, निशा तायल, रंजीत श्रीवास्तव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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