क्यों हम एक दूसरे की खबर रखें, कम से कम इतना तो सब्र रखें
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विनोद रोहतकी ने गजल, क्यों हम एक दूसरे की खबर रखें, कम से कम इतना तो सब्र रखें, समंदर के बस की तो यह बात नहीं रही, कोई है मुझे डुबोने का जो हुनर रखे पेशकर रिश्तों की डोर का बखान किया। किशोरी लाल कौंडल ने श्रृंगार रस में प्रस्तुत रचना आई बरसात नशीली रात, मेरा मन तरसे, घन गरजन के साथ हुई सौगात यूं रिमझिम बरसे, मेघ ने छेड़ा राग है दिल में आग जो भड़के रातों में, आए पिया की याद, हुई बरबाद मैं इन बरसातों में....ने माहौल रुमानियत से भर दिया। मौका था राष्ट्रीय कवि संगम की सोलन इकाई तथा जिला भाषा एवं संस्कृति विभाग सोलन के संयुक्त तत्वावधान में बाल पुस्तकालय में कवि गोष्ठी का। सोलन शहर तथा आसपास से कवियों ने इसमें भाग लिया।
कवि गोष्ठी में महिलाएं भी पीछे नहीं रही। कुमारी अनुराधा ने बरगद शीर्षक से वृद्धावस्था की मनोस्थिति पर चोट करते हुए कविता पढ़ी। कहा कि मैंने धूप में छाया दी बारिश में आसरा, फिर भी आज बांटे जा रहा हूं, शायद बूढ़ा हो गया हूं। ममता ठाकुर ने परिवार में बेटियों की भूमिका का बखान करते हुए कहा कि बेटी का जो मोल है वो चुका सकता नहीं कोई, बेटी का जो रोल है वो निभा सकता नहीं कोई। बेटी से रोशन होते हैं दो घर, बिन बेटी के तो हर घर है बेघर पर खूब वाहवाही बटोरी।
पद्मदेव शास्त्री ने हाल ही में हुए शूलिनी मेले पर लंबी कविता में मेले का बखान किया। केवल राम कश्यप ने पहाड़ी बोली में जमीन बेचने के बाद परिवार की स्थिति का दर्द प्रस्तुत किया। अमर सिंह बरवाल तथा हेमंत्र अत्री ने व्यंग्य रचनाएं प्रस्तुत कीं। इस अवसर पर ऊशा आनंद, सविता ठाकुर, मंजुला ठाकुर, डॉ. प्रियंका वैद्य, मदन हिमाचली के अलावा पंडित संतराम, डॉ. शंकर वासिष्ठ, एचएस ठाकुर, संजीव कुमार, सेवाराम और आशा मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता साहित्यकार हरीश जोशी ने की। भाषा अधिकारी भीम सिंह चौहान मौजूद रहे।