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मटर और छोटे फलदार पौधों को नुकसान पहुंचा रहा पाला
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ोलन में मटर को नुकसान पहुंचा रहा पाला। संवाद
- फोटो : SOLAN
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सोलन। जिले में बारिश और बर्फबारी के बाद किसान-बागवानों को पाले और कोहरे से नुकसान झेलना पड़ रहा है। सबसे अधिक नुकसान सोलन, नालागढ़, कुनिहार, धर्मपुर, कंडाघाट ब्लॉक में हो रहा है।
किसानों-बागवानों को आशंका है कि उनके पौधे इस बार पाले से बर्बाद हो जाएंगे। यह पाला न केवल छोटे पौधों बल्कि बड़े पौधों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। जिले के निचले क्षेत्र बीबीएन में कोहरे और घनी धुंध से धूप कम ही निकल पा रही है।
वर्तमान में किसानों को नकदी फसलें गोभी, ब्रोकली, धनिया और मटर को पाले के प्रकोप से बचाना मुश्किल हो रहा है। सोलन जिले में बागवानी फसलों के अधीन 700 हेक्टेयर भूमि आती है। पिछले वर्ष बागवानी विभाग की ओर सेब, नाशपाती सहित अन्य विभिन्न किस्मों के फलदार पौधे बागवानों को दिए थे।
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इन बागवानों और किसानों को पौधों को पाले से बचाने के लिए चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार सोलन जिला में पाला दिसंबर माह से पडना शुरू हो जाता है। पाला तब पड़ता है, जब आसमान बिल्कुल साफ हो। हवा बिल्कुल न चलें और तापमान 4 डिग्री सैल्सियस से कम हो। पौधों के अलावा क्षेत्र में इन दिनों गेहूं, जौ, मटर, आलू आदि की फसलें लगी हैं। यह फसलें पाले के कारण खराब हो रही हैं।
ऐसे बचाएं पौधे
कृषि मौसम वैज्ञानिक पर्यावरण विज्ञान विभाग नौणी विवि के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश भारद्वाज ने बताया वर्षा कालीन फलदार छोटे पौधों को पाले से बचाकर रखें। घास सरकंडों या सूखी मक्की के डंठल का पौधों के ऊपर छप्पर बनाएं। यह छप्पर दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर खुला रखें। सभी फलदार पौधों की हल्की सिंचाई करते रहें और सूखी घास जलाकर धुआं करते रहें।
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किसानों-बागवानों को आशंका है कि उनके पौधे इस बार पाले से बर्बाद हो जाएंगे। यह पाला न केवल छोटे पौधों बल्कि बड़े पौधों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। जिले के निचले क्षेत्र बीबीएन में कोहरे और घनी धुंध से धूप कम ही निकल पा रही है।
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वर्तमान में किसानों को नकदी फसलें गोभी, ब्रोकली, धनिया और मटर को पाले के प्रकोप से बचाना मुश्किल हो रहा है। सोलन जिले में बागवानी फसलों के अधीन 700 हेक्टेयर भूमि आती है। पिछले वर्ष बागवानी विभाग की ओर सेब, नाशपाती सहित अन्य विभिन्न किस्मों के फलदार पौधे बागवानों को दिए थे।
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इन बागवानों और किसानों को पौधों को पाले से बचाने के लिए चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार सोलन जिला में पाला दिसंबर माह से पडना शुरू हो जाता है। पाला तब पड़ता है, जब आसमान बिल्कुल साफ हो। हवा बिल्कुल न चलें और तापमान 4 डिग्री सैल्सियस से कम हो। पौधों के अलावा क्षेत्र में इन दिनों गेहूं, जौ, मटर, आलू आदि की फसलें लगी हैं। यह फसलें पाले के कारण खराब हो रही हैं।
ऐसे बचाएं पौधे
कृषि मौसम वैज्ञानिक पर्यावरण विज्ञान विभाग नौणी विवि के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश भारद्वाज ने बताया वर्षा कालीन फलदार छोटे पौधों को पाले से बचाकर रखें। घास सरकंडों या सूखी मक्की के डंठल का पौधों के ऊपर छप्पर बनाएं। यह छप्पर दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर खुला रखें। सभी फलदार पौधों की हल्की सिंचाई करते रहें और सूखी घास जलाकर धुआं करते रहें।