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सब बदला पर नहीं बदली परवाणू सेब मंडी की तस्वीर
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Fri, 08 Jul 2016 11:40 PM IST
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प्रदेश के बागवानों को बाहर की मंडियों में लूट से बचाने और उन्हें प्रदेश में ही बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से 90 के दशक में परवाणू में बनाई सेब टर्मिनल मंडी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है।
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश के बागवानों को बाहर की मंडियों में लूट से बचाने और उन्हें प्रदेश में ही बेहतर सुविधाएं देने के उद्देश्य से 90 के दशक में परवाणू में बनाई सेब टर्मिनल मंडी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है।
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट रही इस मंडी में 3 से 4 सेब सीजनों के दौरान व्यापार में तो वृद्धि हुई है लेकिन सुविधाओं के मामले में यह मंडी अभी भी 20 साल पहले की व्यवस्था पर चल रही है। इसका खामियाजा यहां आकर व्यापार करने वाले बागवानों, आढ़तियों, व्यापारियों और मेहनतकश मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।
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आलम यह है की मंडी में शौचालयों और स्नानागार तक की सुविधा भी नहीं है। इसके चलते यहां रोजाना हजारों की तादाद में आने वाले लोगों को मुश्किलें झेेलनी पड़ रही हैं। सुविधाओं की कमी के चलते पिछले सीजन के दौरान तो लोग इस कदर परेशान हो गए थे कि दो दिन तक यहां व्यापारिक गतिविधियां ही ठप रहीं।
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वहीं डीसी राकेश कंवर ने कहा कि सेब सीजन में बागवानों को दिक्कत न हो, इसके लिए बेहतर प्रबंध करने के निर्देश संबंधित विभागों और समिति को दे दिए हैं।
यहां आ रही परेशानी
परवाणू सेब मंडी में यूपी, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र आदि से व्यापारी बड़ी तादाद में आते हैं लेकिन इनके रहने के लिए न तो कोई गेस्ट हाउस है और न ही कोई सराय तथा किसान भवन।
इसके चलते उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बागवानों का कहना है की मंडी में ट्रक खड़े करने की जगह कच्ची होने से बारिश के दौरान बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ता है और मिट्टी में अक्सर ट्रकों के पहिये धंस जाते हैं।
शौचालय तक की व्यवस्था नहीं
मंडी में सेब सीजन के दौरान लोडिंग अनलोडिंग के लिए आने वाले लगभग 250 मजदूरों के रहने की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा शौचालयों और नहाने तक की सुविधा भी नहीं है। इसके चलते मजदूरों को बाहर चश्मों पर नहाना पड़ता है। मंडी में शौचालय की जो सुविधा है वो 250 लोगों के लिए अपर्याप्त है। फलस्वरूप मजदूर बाहर में शौच करके स्वच्छता अभियान की धज्ज्यिां उड़ाते हैं।
मंडी तक पहुंचने वाली सड़क बदहाल
कालका-शिमला रोड से मंडी को जाती सड़क की हालत भी खस्ताहाल है। पिछले सीजन के दौरान भी यहां सेब से लदे कई ट्रक पलट गए थे। लेकिन इस सीजन के दौरान भी हालत जस के तस हैं। कुल मिलाकर हर वर्ष करोड़ों का राजस्व देने वाली सेब मंडी परवाणू में सुविधाएं नाममात्र भी नहीं हैं।