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Solan News: दयारशघाट में श्रीराम कथा व शतचंडी महायज्ञ का आयोजन
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, आचार्य राहुल शर्मा ने दूसरे दिन सुनाई रामकथा
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। दयारशघाट में चल रही श्रीराम कथा व शतचंडी महायज्ञ में दूसरे दिन आचार्य राहुल शर्मा ने अपनी वाणी से श्रीराम कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने ऋषि यागवल्क्य और भारद्वाज मुनि के संवाद तथा शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाई। आचार्य राहुल शर्मा ने बताया कि जब भारद्वाज मुनि के मन में श्रीराम को लेकर संशय उत्पन्न होता है, तो वह तीर्थराज प्रयाग में ऋषि यागवल्क्य से राम तत्व के संबंध में प्रश्न करते हैं। यागवल्क्य उन्हें शिव-पार्वती की कथा सुनाकर उनके संशय को दूर करते हैं। त्रेतायुग में भगवान शिव और माता सती अगस्त मुनि के आश्रम में राम कथा सुनते हैं। कथा के दौरान माता पार्वती श्रीराम के स्वरूप को पहचानने में असमर्थ रहती हैं, जबकि भगवान शिव पूरी तरह कथा का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। इसके पश्चात पार्वती ने राम को सीता के रूप में परखने की कोशिश की, जिसे भगवान राम पहचान लेते हैं। आचार्य राहुल शर्मा ने आगे कहा कि इसके बाद सती का दक्ष के यज्ञ में जाना, हिमालय की पुत्री के रूप पार्वती के जन्म, उनकी तपस्या और शिव विवाह की कथा सुनाई गई। तीसरे दिन सोमवार को आचार्य रामजन्म से आगे की कथा प्रस्तुत करेंगे। कथा के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। यह रामकथा व शतचंडी महायज्ञ 26 जनवरी तक चलेगा और पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। दयारशघाट में चल रही श्रीराम कथा व शतचंडी महायज्ञ में दूसरे दिन आचार्य राहुल शर्मा ने अपनी वाणी से श्रीराम कथाओं का वर्णन किया। उन्होंने ऋषि यागवल्क्य और भारद्वाज मुनि के संवाद तथा शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनाई। आचार्य राहुल शर्मा ने बताया कि जब भारद्वाज मुनि के मन में श्रीराम को लेकर संशय उत्पन्न होता है, तो वह तीर्थराज प्रयाग में ऋषि यागवल्क्य से राम तत्व के संबंध में प्रश्न करते हैं। यागवल्क्य उन्हें शिव-पार्वती की कथा सुनाकर उनके संशय को दूर करते हैं। त्रेतायुग में भगवान शिव और माता सती अगस्त मुनि के आश्रम में राम कथा सुनते हैं। कथा के दौरान माता पार्वती श्रीराम के स्वरूप को पहचानने में असमर्थ रहती हैं, जबकि भगवान शिव पूरी तरह कथा का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं। इसके पश्चात पार्वती ने राम को सीता के रूप में परखने की कोशिश की, जिसे भगवान राम पहचान लेते हैं। आचार्य राहुल शर्मा ने आगे कहा कि इसके बाद सती का दक्ष के यज्ञ में जाना, हिमालय की पुत्री के रूप पार्वती के जन्म, उनकी तपस्या और शिव विवाह की कथा सुनाई गई। तीसरे दिन सोमवार को आचार्य रामजन्म से आगे की कथा प्रस्तुत करेंगे। कथा के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उपस्थिति दर्ज कराई और भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। यह रामकथा व शतचंडी महायज्ञ 26 जनवरी तक चलेगा और पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा।