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Solan News: श्रीकृष्ण जन्म और बाल लीलाओं की सुनाई कथा
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कंडाघाट के जधाना गांव में चल रही है श्रीमद् भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। उपमंडल कंडाघाट के जधाना गांव में श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य पंडित प्रवीण भार्गव ने श्रीकृष्ण जन्म एवं उनकी बाल लीलाओं के प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है, तब दुष्टों के संहार के लिए भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं।
उन्होंने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं, क्योंकि यह दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस माना जाता है। इसी तिथि की अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
कथा में बताया गया कि कंस अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुंचाने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान उसका काल होगी। यह सुनते ही कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी सात संतानें मार डालीं। जब आठवां बच्चा होना था, तब कारागार में कड़ा पहरा बैठा दिया गया।
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इसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी संतान होने वाली थी। संयोग से देवकी को पुत्र और यशोदा को कन्या का जन्म हुआ। इस दौरान वासुदेव-देवकी को चतुर्भुज भगवान के दर्शन हुए। भगवान ने कहा-अब मैं नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। मुझे वृंदावन ले जाकर अपने मित्र नंद के घर छोड़ दो और वहां जन्मी कन्या को कंस के हवाले कर दो।
वासुदेव ने ऐसा ही किया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की शिशु रूप में झांकी निकाली गई। भक्तों ने नाच-गाकर कृष्ण जन्मोत्सव मनाया और बाल लीलाओं के प्रसंगों का श्रवण किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। उपमंडल कंडाघाट के जधाना गांव में श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य पंडित प्रवीण भार्गव ने श्रीकृष्ण जन्म एवं उनकी बाल लीलाओं के प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है, तब दुष्टों के संहार के लिए भगवान किसी न किसी रूप में अवतार लेते हैं।
उन्होंने बताया कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कहते हैं, क्योंकि यह दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिवस माना जाता है। इसी तिथि की अंधेरी आधी रात को रोहिणी नक्षत्र में मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ।
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कथा में बताया गया कि कंस अपनी बहन देवकी को ससुराल पहुंचाने जा रहा था, तभी आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान उसका काल होगी। यह सुनते ही कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनकी सात संतानें मार डालीं। जब आठवां बच्चा होना था, तब कारागार में कड़ा पहरा बैठा दिया गया।
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इसी समय नंद की पत्नी यशोदा को भी संतान होने वाली थी। संयोग से देवकी को पुत्र और यशोदा को कन्या का जन्म हुआ। इस दौरान वासुदेव-देवकी को चतुर्भुज भगवान के दर्शन हुए। भगवान ने कहा-अब मैं नवजात शिशु का रूप धारण कर लेता हूं। मुझे वृंदावन ले जाकर अपने मित्र नंद के घर छोड़ दो और वहां जन्मी कन्या को कंस के हवाले कर दो।
वासुदेव ने ऐसा ही किया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की शिशु रूप में झांकी निकाली गई। भक्तों ने नाच-गाकर कृष्ण जन्मोत्सव मनाया और बाल लीलाओं के प्रसंगों का श्रवण किया।