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Solan News: रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया
Thu, 16 Nov 2023 11:55 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 16 Nov 2023 11:55 PM IST
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नालागढ़ के झिड़ीवाला में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में रूक्मणी विवाह पर प्रसंग सुनाते कथाव्यास सुन
झिड़ीवाला में आज होगा श्रीमद्भागवत कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। झिड़ीवाला में कार्तिक मास के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथाव्यास नीलकंठ कौशल महाराज ने रुक्मिणी विवाह से जुड़े प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बुद्धिमान, सुंदर और सरल स्वभाव वाली थीं। पुत्री के विवाह के लिए पिता भीष्मक योग्य वर की तलाश कर रहे थे। राजा के दरबार में जो कोई भी आता वह श्रीकृष्ण के साहस और वीरता की प्रशंसा करता। कृष्ण की वीरता की कहानियां सुनकर देवी रुक्मिणी ने उन्हें मन ही मन अपना पति मान लिया था, लेकिन उसका भाई रुक्मी अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से करवाना चाहता था। इसलिए रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण के हाथों एक पत्र श्रीकृष्ण को भिजवा दिया। कृष्ण ने अनुरोध को स्वीकार कर लिया और विवाह वाले दिन रुक्मिणी मंदिर जाने का बहाना लगा कर मंदिर से निकलीं और भगवान के साथ विवाह कर लिया। इस अवसर पर श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह से जुड़ी मनोहर झांकियां भी निकाली गई। कथा के अंत में संजीव कुमार वर्मा, तरसेम लाल, श्रवण कुमार, कुलवंत सिह, रमेश कुमार, आदि यजमानों ने भगवान की आरती की।
आरती के बाद सभी के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई थी। शुक्रवार को पूर्णाहुति होगी। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। झिड़ीवाला में कार्तिक मास के उपलक्ष्य में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथाव्यास नीलकंठ कौशल महाराज ने रुक्मिणी विवाह से जुड़े प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी बुद्धिमान, सुंदर और सरल स्वभाव वाली थीं। पुत्री के विवाह के लिए पिता भीष्मक योग्य वर की तलाश कर रहे थे। राजा के दरबार में जो कोई भी आता वह श्रीकृष्ण के साहस और वीरता की प्रशंसा करता। कृष्ण की वीरता की कहानियां सुनकर देवी रुक्मिणी ने उन्हें मन ही मन अपना पति मान लिया था, लेकिन उसका भाई रुक्मी अपनी बहन का विवाह शिशुपाल से करवाना चाहता था। इसलिए रुक्मिणी ने एक ब्राह्मण के हाथों एक पत्र श्रीकृष्ण को भिजवा दिया। कृष्ण ने अनुरोध को स्वीकार कर लिया और विवाह वाले दिन रुक्मिणी मंदिर जाने का बहाना लगा कर मंदिर से निकलीं और भगवान के साथ विवाह कर लिया। इस अवसर पर श्रीकृष्ण रुक्मिणी विवाह से जुड़ी मनोहर झांकियां भी निकाली गई। कथा के अंत में संजीव कुमार वर्मा, तरसेम लाल, श्रवण कुमार, कुलवंत सिह, रमेश कुमार, आदि यजमानों ने भगवान की आरती की।
आरती के बाद सभी के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई थी। शुक्रवार को पूर्णाहुति होगी। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा ।