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Solan News: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया बखान
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हनुमान मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन सुनाए प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। हनुमान मंदिर परिसर रामशहर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ आचार्य राजेश शर्मा ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। आचार्य ने कहा कि जब कंस को पता चला कि उसका काल गोकुल में है, तो उसने अष्टमी की रात्रि को जन्म लेने वाले सभी बच्चों को मारने के लिए राक्षसी पूतना को भेजा।
पूतना ने भेष बदलकर भगवान कृष्ण को जहरीला दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन बाल कृष्ण ने स्तन के रास्ते पूतना के प्राण हर लिए। इसके बाद कंस ने वकासुर राक्षस को भेजा। उसने विशाल बगुले का रूप धारण करके कृष्ण को मारने की कोशिश की, परंतु भगवान कृष्ण ने उसे भी नष्ट कर दिया।
आचार्य ने बताया कि कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजा करते हैं, लेकिन भगवान कृष्ण उन्हें गोवर्धन की पूजा करने की प्रेरणा देते हैं। इससे क्रोधित होकर भगवान इंद्र गोकुल में भारी वर्षा भेजते हैं। भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी लोगों को वर्षा से बचाया। इस घटना से भगवान इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया। कथा का आयोजन 25 सितंबर से प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक जारी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। हनुमान मंदिर परिसर रामशहर में श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ आचार्य राजेश शर्मा ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। आचार्य ने कहा कि जब कंस को पता चला कि उसका काल गोकुल में है, तो उसने अष्टमी की रात्रि को जन्म लेने वाले सभी बच्चों को मारने के लिए राक्षसी पूतना को भेजा।
पूतना ने भेष बदलकर भगवान कृष्ण को जहरीला दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन बाल कृष्ण ने स्तन के रास्ते पूतना के प्राण हर लिए। इसके बाद कंस ने वकासुर राक्षस को भेजा। उसने विशाल बगुले का रूप धारण करके कृष्ण को मारने की कोशिश की, परंतु भगवान कृष्ण ने उसे भी नष्ट कर दिया।
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आचार्य ने बताया कि कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजा करते हैं, लेकिन भगवान कृष्ण उन्हें गोवर्धन की पूजा करने की प्रेरणा देते हैं। इससे क्रोधित होकर भगवान इंद्र गोकुल में भारी वर्षा भेजते हैं। भगवान कृष्ण ने अपनी कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर सभी लोगों को वर्षा से बचाया। इस घटना से भगवान इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया। कथा का आयोजन 25 सितंबर से प्रतिदिन दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक जारी है।
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