{"_id":"570ceab74f1c1b91764a6aca","slug":"mc-wash-your-tank","type":"story","status":"publish","title_hn":"नप आधी दरों पर साफ करेगी आपके सीवरेज टैंक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नप आधी दरों पर साफ करेगी आपके सीवरेज टैंक
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Tue, 12 Apr 2016 10:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। अब आपके घर में सीवरेज और मलनिकासी की गंदगी शहर की आबोहवा को दूषित नहीं करेगी। न ही प्राकृतिक स्रोतों में मिलकर जलजनित रोग फैलेंगे। बस सेप्टिक टैंक भर जाने पर आपको नगर परिषद को एक फोन कॉल करनी होगी। आपके घरद्वार तक टीम पहुंचकर समस्या का निदान करेगी। वह भी करीब 60 फीसदी कम रेट पर।
विज्ञापन
यह सारा काम होगा आधुनिक वैक्यूम विधि से। इसे नगर परिषद सोलन शहर में जल्द शुरू करेगा। इससे न केवल आपके टैंकों की गंदगी साफ होगी, बल्कि टैंक भी साफ सुथरा होगा। वहीं गंदगी को खुले में कहीं भी फेंकने के बजाय कॉलेज रोड के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में डाला जाएगा। साथ ही निजी एजेंसियों को सफाई के लिए जेब भी ढीली करनी होगी। नगर परिषद के अध्यक्ष पवन गुप्ता ने बताया कि सैप्टिक टैंक वाशिंग मशीन की दरों की सूची जल्द निर्धारित की जाएगी। इसके बाद एक फोन काल पर इस सुविधा का लाभ शहर के सभी 15 वार्डों के लोग उठा पाएंगे।
विज्ञापन
दो नई मशीनें पहुंचीं
नगर परिषद ने दो नई मशीनों को हायर किया है। इन मशीनों के माध्यम से न केवल सैप्टिक टैंक खाली होगा बल्कि पूरी तरह से साफ भी होगा। नगर परिषद के कर्मचारियों को ही इस विधि से ट्रेंड करने की योजना है। इससे नगर परिषद के दायरे में आने वाले क्षेत्रों से इस सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
विज्ञापन
60 फीसदी कम रेट पर सुविधा
शहर में घरों और व्यावसायिक भवनों के सैप्टिक टैंकों को साफ करने के लिए निजी कंपनियां सात से दस हजार रुपये लेती हैं। वही नप अधिकारियों का दावा है कि नप इससे लगभग 60 प्रतिशत कम दाम पर सैप्टिक टैंक साफ करवाएगी। नप द्वारा ली जाने वाली राशि सैप्टिक टैंक की क्षमता और नप कार्यालय से घर की दूरी के हिसाब से ऊपर नीचे हो सकती है।
पीलिया को न्योता देने वाली थी व्यवस्था
शहर में पहले सैप्टिक टैंक के भरने पर निजी कंपनियों द्वारा उसकी सफाई की जाती थी। साथ ही गंदगी को आसपास की नालियों में फेंक दिया जाता था। इससे प्राकृतिक जल स्रोत दूषित हो रहे थे। संक्रमण फैलने का खतरा भी हर दम बना रहता है। शहर की आबोहवा भी दूषित रहती थी। नगर परिषद टैंक को साफ करने के बाद गंदगी को सीवेज प्लांट में फेंकेगी।
अधिकांश जल स्रोतों के सैंपल हुए थे फेल
शहर में पीलिया फैलने के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अधिकांश प्राकृतिक स्रोतों से सैंपल भरे थे। कई प्राकृतिक जल स्रोतों से पानी पीने योग्य नहीं था। वहां विभाग ने चेतावनी बोर्ड लगाकर पानी न पीने की चेतावनी दी थी। तर्क दिया गया था कि शहर की गंदगी कई जगह से प्राकृतिक जल स्रोतों से भी मिलती है। इस कारण सैंपल फेल हो रहे हैं।