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मां शूलिनी ने स्वीकारा मेला, प्राचीन पीठ्म से मंदिर में विराजमान
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सोलन। कोविड के बीच आयोजित मेला शनिवार रात को मां शूलिनी ने स्वीकार कर लिया। रविवार को दो बहनों के मिलन के बाद मां शूलिनी अपने मंदिर में विराजमान हो गईं। दोपहर ठीक तीन बजे पुलिस ने शहर के बाजारों को जाने वाले रास्तों पर धारा-144 लगा कर नाकाबंदी कर दी थी। ढोल-नगाड़ों, शहनाइयों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर रविवार को राज्य स्तरीय मां शूलिनी मेला संपन्न हुआ। रविवार दोपहर तीन बजे से पांच बजे तक लोगों की भीड़ रोकने के लिए कर्फ्यू लगा रहा। पुलिस जवान माल रोड, मुख्य बाजार, चौक बाजार और मां शूलिनी मंदिर को छावनी में बदल चुके थे।
कर्फ्यू के बीच चार बजते ही मंदिर से ढोल-नगाड़े की आवाज सुन लोग छतों पर दर्शन के लिए निकल आए। पुलिस की सुरक्षा में मुख्य पुजारी और देवी के गुर हाथों में मां शूलिनी की मूर्तियां मंदिर से मूल स्थान की ओर रवाना हुईं। लोग कोरोना के चलते माता की शोभायात्रा में घर की बालकनी से ही दर्शन करने को मजबूर रहे।
मां शूलिनी मंदिर में उपायुक्त कृतिका कुल्हारी, एसडीएम अजय यादव, एसपी अभिषेक यादव, सहित बड़े अधिकारियों ने पंडितों के साथ मेले के अंतिम दिन पूजा, हवन किया। उपायुक्त कृतिका कुल्हारी ने सूक्ष्म रूप से मनाए मां शूलिनी मेले के सफल आयोजन पर सभी का आभार जताया।
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मां शूलिनी मंदिर के पुजारी पंडित रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि तीन दिनों तक चले मां शूलिनी मेले को सूक्ष्म रूप से मनाया गया। शनिवार शाम को मां ने कोविड के बीच हुए मेले को स्वीकार किया। रविवार को चार बजे प्राचीन पीठ्म से मां की शोभायात्रा शूलिनी मंदिर की ओर रवाना हुई और मां मंदिर में विराजमान हो गईं।
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कर्फ्यू के बीच चार बजते ही मंदिर से ढोल-नगाड़े की आवाज सुन लोग छतों पर दर्शन के लिए निकल आए। पुलिस की सुरक्षा में मुख्य पुजारी और देवी के गुर हाथों में मां शूलिनी की मूर्तियां मंदिर से मूल स्थान की ओर रवाना हुईं। लोग कोरोना के चलते माता की शोभायात्रा में घर की बालकनी से ही दर्शन करने को मजबूर रहे।
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मां शूलिनी मंदिर में उपायुक्त कृतिका कुल्हारी, एसडीएम अजय यादव, एसपी अभिषेक यादव, सहित बड़े अधिकारियों ने पंडितों के साथ मेले के अंतिम दिन पूजा, हवन किया। उपायुक्त कृतिका कुल्हारी ने सूक्ष्म रूप से मनाए मां शूलिनी मेले के सफल आयोजन पर सभी का आभार जताया।
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मां शूलिनी मंदिर के पुजारी पंडित रामस्वरूप शर्मा ने कहा कि तीन दिनों तक चले मां शूलिनी मेले को सूक्ष्म रूप से मनाया गया। शनिवार शाम को मां ने कोविड के बीच हुए मेले को स्वीकार किया। रविवार को चार बजे प्राचीन पीठ्म से मां की शोभायात्रा शूलिनी मंदिर की ओर रवाना हुई और मां मंदिर में विराजमान हो गईं।