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Solan News: महुआ में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन
Sun, 14 Apr 2024 11:22 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 14 Apr 2024 11:22 PM IST
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जलपा माता मंदिर में श्रीमदभागवत कथा के दौरान भजन पर झूमते श्रोतागण। संवाद
जालपा माता मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा का छठा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। क्षेत्र के साथ लगते महुआ में जालपा माता मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। व्यासपीठ आचार्य गोपाल कृष्ण ने कथा में सुनाया कि जब कंस को पता चला कि देवकी की आठवीं संतान कन्या हुई है तो उसे मारने आया तो देवकी ने विनती की कि यह तो कन्या है। इसे छोड़ दो परंतु कंस ने उसे पकड़ कर जैसे ही पटकने के लिए उठाया तो कन्या उसके हाथ से छूट कर आकाश मार्ग को चली गई। साथ ही जाते-जाते कंस को कहा कि तेरा काल तो गोकुल में है।
तो कंस ने उस रात को पैदा हुए बच्चों को मारने का हुकुम दे दिया। कंस कृष्ण को मारने के लिए बेताब था, इसलिए उसने राक्षसी पूतना को बुलाया। उसने पूतना को एक सुंदर युवती का रूप धारण करने और पिछले दस दिनों में पैदा हुए गोकुल के सभी बच्चों को मारने के लिए कहा।
अंत में राक्षस ने बैल के शरीर को छोड़ दिया और भगवान को प्रणाम किया। इसी प्रकार कंस ने अघासुर नामक दैत्य को भेजा। उसने अजगर का रूप धारण किया और खुद को एक गुफा जितना लंबा और एक पहाड़ जितना बड़ा बना लिया। इसके अतिरिक्त आचार्य ने गोवर्धन पूजा के प्रसंग का भी वर्णन किया कि किस प्रकार इंद्र के अभिमान को तोड़ा था। कथा में मंदिर कमेटी के प्रधान श्री प्रेमलाल भारद्वाज, सचिव मोहिंद्र पाल भारद्वाज, कोषाध्यक्ष हरिराम भारद्वाज सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। क्षेत्र के साथ लगते महुआ में जालपा माता मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। व्यासपीठ आचार्य गोपाल कृष्ण ने कथा में सुनाया कि जब कंस को पता चला कि देवकी की आठवीं संतान कन्या हुई है तो उसे मारने आया तो देवकी ने विनती की कि यह तो कन्या है। इसे छोड़ दो परंतु कंस ने उसे पकड़ कर जैसे ही पटकने के लिए उठाया तो कन्या उसके हाथ से छूट कर आकाश मार्ग को चली गई। साथ ही जाते-जाते कंस को कहा कि तेरा काल तो गोकुल में है।
तो कंस ने उस रात को पैदा हुए बच्चों को मारने का हुकुम दे दिया। कंस कृष्ण को मारने के लिए बेताब था, इसलिए उसने राक्षसी पूतना को बुलाया। उसने पूतना को एक सुंदर युवती का रूप धारण करने और पिछले दस दिनों में पैदा हुए गोकुल के सभी बच्चों को मारने के लिए कहा।
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अंत में राक्षस ने बैल के शरीर को छोड़ दिया और भगवान को प्रणाम किया। इसी प्रकार कंस ने अघासुर नामक दैत्य को भेजा। उसने अजगर का रूप धारण किया और खुद को एक गुफा जितना लंबा और एक पहाड़ जितना बड़ा बना लिया। इसके अतिरिक्त आचार्य ने गोवर्धन पूजा के प्रसंग का भी वर्णन किया कि किस प्रकार इंद्र के अभिमान को तोड़ा था। कथा में मंदिर कमेटी के प्रधान श्री प्रेमलाल भारद्वाज, सचिव मोहिंद्र पाल भारद्वाज, कोषाध्यक्ष हरिराम भारद्वाज सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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