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Solan News: कान्हा की मुरली पर झूमा कुनिहार, रासलीला ने बांधा समां

Sat, 05 Sep 2026 12:14 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Updated Sat, 05 Sep 2026 12:14 AM IST
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Kunihar danced to the tune of Krishna's flute, Raasleela enthralled the audience.
प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद
ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में चल रही है श्रीमद्भागवत कथा
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। प्राचीन ठाकुरद्वारा मंदिर हाटकोट कुनिहार में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में श्रीरामलीला जनकल्याण समिति की ओर से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास अरुणानंद आनंद ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ रासलीला का वर्णन किया। कथा के दौरान कृष्ण भक्ति में डूबे श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में वात्सल्य, प्रेम और भक्ति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। उन्होंने माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए बताया कि नंदलाल अपनी नटखट अदाओं से गोकुल की गोपियों का मन मोह लेते थे। माता यशोदा द्वारा श्रीकृष्ण को ऊखल से बांधने और भगवान द्वारा यमलार्जुन वृक्षों का उद्धार करने का प्रसंग भी सुनाया गया। इसके बाद वत्सासुर, बकासुर और अघासुर के उद्धार तथा कालिया नाग दमन की कथा सुनाई गई। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने बाल अवस्था में ही अधर्म और अत्याचार का अंत कर धर्म की रक्षा का संदेश दिया।
रासलीला प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कथा व्यास ने कहा कि शरद पूर्णिमा की रात जब श्रीकृष्ण ने मुरली बजाई तो उसकी मधुर धुन सुनकर गोपियां सब कुछ छोड़कर भगवान के पास पहुंच गईं। रासलीला सांसारिक प्रेम नहीं, बल्कि जीवात्मा और परमात्मा के निष्काम एवं दिव्य प्रेम का प्रतीक है। गोपियों का कृष्ण के प्रति समर्पण भक्त और भगवान के बीच अटूट प्रेम को दर्शाता है।
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उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की मुरली का संदेश है कि मनुष्य जब अपने भीतर के अहंकार और मोह को त्यागकर भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण करता है, तभी उसे सच्चे आनंद की अनुभूति होती है। कथा के दौरान भजनों और श्रीकृष्ण के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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