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Solan News: ट्रीटमेंट की जगह प्रदूषण, अर्की खड्ड में छोड़ा जा रहा प्लांट का सीवर

Sun, 08 Feb 2026 11:14 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:14 PM IST
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Instead of treatment, pollution is being caused by sewage plant water being released into Arki Khad.
अर्की खड्ड में छोड़ा जा रहा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का गंदा पानी। संवाद
-ग्राउंड रिपोर्ट-
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बातल, मांझू, काटल गांवों के लोग झेल रहे परेशानी, बीमारियां फैलने का अंदेशा

कुनिहार की कूनी-गंभर खड्ड में मिलता है पानी, पेयजल योजनाओं से सप्लाई हो रहा पानी

संवाद न्यूज एजेंसी

अर्की (सोलन)। सीवरेज प्लांट अर्की का गंदा पानी (सीवेज) खुलेआम साथ लगती खड्ड में छोड़ा जा रहा है। इससे खड्ड का पानी दूषित हो रहा है। जहां-जहां से खड्ड बह रही है, वहां बदबू फैल रही है। इस खड्ड का पानी सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे किसानों को सब्जियों के विषाक्त होने का खतरा पैदा हो गया है। गनीमत है कि अर्की, बातल, मांझू आदि क्षेत्रों की पेयजल योजनाएं इस खड्ड पर निर्भर नहीं हैं, लेकिन यह खड्ड आगे जाकर कूनी और गंभर खड्ड में मिलती है। इन खड्डों पर कुनिहार क्षेत्र की कई पेयजल योजनाएं आधारित हैं। ऐसे में सीवरेज प्लांट का पानी गुपचुप तरीके से अर्की खड्ड में छोड़े जाने से जलशक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
अर्की-मांझू सड़क पर बने सीवरेज प्लांट का दूषित पानी पेयजल योजनाओं को प्रभावित करने के साथ-साथ लोगों की बीमारियों का कारण भी बन सकता है। एक करोड़ की लागत से अर्की-मांझू सड़क के साथ मठी मंदिर के पास बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पूरे नगर पंचायत की सीवेज पहुंचती है। यहां से गंदा पानी मुख्य पाइप से अर्की खड्ड में छोड़ा जा रहा है। जलशक्ति विभाग का दावा है कि सीवेज को ट्रीट करने के बाद ही पानी खड्ड में छोड़ा जा रहा है।
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तल पंचायत के लोगों का कहना है कि खड्ड और आसपास क्षेत्रों में बदबू से बुरा हाल है। लोगों के अनुसार जिस स्थान पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी खड्ड में मिल रहा है, वहां पानी का रंग पूरी तरह अलग नजर आता है और खड्ड में काली परतें भी साफ देखी जा सकती हैं। इस पानी से कुनिहार क्षेत्र की कई पंचायतों की पेयजल योजनाएं जुड़ी हैं। इसके अलावा बातल, काटल समेत कई गांवों के लोग खेतीबाड़ी और पशुओं के लिए भी इसी पानी का इस्तेमाल करते हैं।
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बातल के हैपी ने बताया कि खड्ड के साथ लगते जंगलों के जंगली जानवर इसी पानी को पीते हैं। काटल निवासी देवेंद्र कुमार का कहना है कि सिंचाई के लिए इस पानी का इस्तेमाल करना अब उचित नहीं लगता। खेतों में बदबू और संक्रमण का खतरा है। बातल पंचायत के पूर्व उपप्रधान हरीश शर्मा ने मांग उठाई है कि प्रशासन को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी खड्ड में नहीं छोड़ना चाहिए।
सिंचाई लायक भी नहीं रहा पानी
अर्की खड्ड के किनारे बातल और आसपास के कई गांवों के लोगों की जमीनें हैं। लोग भूमि से घास लेने और खेतीबाड़ी के लिए जाते हैं, लेकिन बदबू के कारण काम करना मुश्किल हो रहा है। यह पानी अब सिंचाई लायक भी नहीं रह गया है। यहां पंचायत सहित आसपास के कई गांवों का श्मशानघाट भी है, जहां अंतिम संस्कार के समय भी बदबू लोगों को परेशान करती है।

-भारत भूषण आंगिरस, निवर्तमान उपप्रधान, ग्राम पंचायत बातल
ट्रीटमेंट के बाद छोड़ा जा रहा पानी
समय-समय पर पानी की जांच की जाती है। पानी को ट्रीटमेंट के बाद ही छोड़ा जा रहा है। खड्ड के किनारे ज्यादातर पेयजल योजनाओं के लिए पानी ट्रीटमेंट प्लांट से लगभग 400 मीटर पहले उठाया गया है।
-विनय गौतम, सहायक अभियंता, जलशक्ति विभाग, अर्की
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