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धुंध से ट्रकों के पहिये थमे
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बद्दी (सोलन)। मैदानी क्षेत्रों में लगातार सुबह और शाम धुंध से ट्रकों के पहिये थम गए हैं। जो ट्रक दो दिन में निर्धारित स्थान पर पहुंचते थे अब वे चार दिन में पहुंच रहे हैं। धुंध से वाहनों के गति धीमी हो गई है। इसका सीधा असर ट्रक संचालकों की जेब पर पड़ रहा है। उद्योगों का सामान भी समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
मैदानी इलाकों में धुंध के कारण गाड़ियां बेहद धीमी गति से चल रही हैं। जो ट्रक 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलता था, वह अब 15 और 20 किमी प्रति घंटा से चल रहा है। पहले चालीस किमी सफर तय करने के लिए एक ट्रक 8 लीटर डीजल लगता था, लेकिन अब 15 के आसपास लीटर डीजल लग रहा है। इससे ट्रक संचालकों को भारी भरकम बोझ सहना रहा है। ट्रक यूनियन नालागढ़ के पास दस हजार ट्रक हैं। इसके अलावा पिकअप, छोटा हाथी, 407 आदि छोटे वाहन भी दस हजार से अधिक हैं। राज्य से बाहर जाने वाले सभी वाहनों पर धुंध असर दिखा रही है।
ट्रक संचालक कृष्ण कौशल, सतविंद्र सैणी, दीपू पंडित, हरनेक ठाकुर, काला सिंह, हाकम सिंह, मक्खन सिंह, करनैल सिंह, बगा राम, बलजीत सिंह ने बताया कि हर वर्ष सर्दी के दो माह मैदानी क्षेत्रों धुंध छाई रहती है। इसका असर ट्रक संचालकों पर पड़ता है। दस टायर वाला ट्रक पहले साढ़े तीन से चार किमी प्रति लीटर खर्च करता था। छह टायर ट्रक एक लीटर में चार से पांच किमी चलता था, लेकिन अब दो से ढाई किमी ही चल पाता है। कृष्ण कौशल ने बताया कि लंबी दूर पर जाने वाले ट्रक संचालकों पर अब साढ़े तीन से चार हजार रुपये प्रति चक्कर अतिरिक्त लग रहा है।
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लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कांसल, हेमराज चौधरी, आदित्य सूद, सुरेंद्र जैन ने बताया कि धुंध के चलते जहां उत्पाद देरी से पहुंच रहा है वहीं उद्योगों को आने वाला कच्चा माल भी देर से पहुंच रहा है।
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मैदानी इलाकों में धुंध के कारण गाड़ियां बेहद धीमी गति से चल रही हैं। जो ट्रक 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलता था, वह अब 15 और 20 किमी प्रति घंटा से चल रहा है। पहले चालीस किमी सफर तय करने के लिए एक ट्रक 8 लीटर डीजल लगता था, लेकिन अब 15 के आसपास लीटर डीजल लग रहा है। इससे ट्रक संचालकों को भारी भरकम बोझ सहना रहा है। ट्रक यूनियन नालागढ़ के पास दस हजार ट्रक हैं। इसके अलावा पिकअप, छोटा हाथी, 407 आदि छोटे वाहन भी दस हजार से अधिक हैं। राज्य से बाहर जाने वाले सभी वाहनों पर धुंध असर दिखा रही है।
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ट्रक संचालक कृष्ण कौशल, सतविंद्र सैणी, दीपू पंडित, हरनेक ठाकुर, काला सिंह, हाकम सिंह, मक्खन सिंह, करनैल सिंह, बगा राम, बलजीत सिंह ने बताया कि हर वर्ष सर्दी के दो माह मैदानी क्षेत्रों धुंध छाई रहती है। इसका असर ट्रक संचालकों पर पड़ता है। दस टायर वाला ट्रक पहले साढ़े तीन से चार किमी प्रति लीटर खर्च करता था। छह टायर ट्रक एक लीटर में चार से पांच किमी चलता था, लेकिन अब दो से ढाई किमी ही चल पाता है। कृष्ण कौशल ने बताया कि लंबी दूर पर जाने वाले ट्रक संचालकों पर अब साढ़े तीन से चार हजार रुपये प्रति चक्कर अतिरिक्त लग रहा है।
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लघु उद्योग भारती के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कांसल, हेमराज चौधरी, आदित्य सूद, सुरेंद्र जैन ने बताया कि धुंध के चलते जहां उत्पाद देरी से पहुंच रहा है वहीं उद्योगों को आने वाला कच्चा माल भी देर से पहुंच रहा है।