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Solan News: बद्दी के हरभजन सिंह चौधरी मरने के बाद करेंगे अंगदान
Mon, 03 Aug 2026 11:28 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Mon, 03 Aug 2026 11:28 PM IST
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बद्दी के गुल्लरवाला निवासी हरभजन सिंह
दान के लिए नोटो की साइट पर ऑनलाइन किया पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बद्दी के गुल्लरवाला निवासी सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर हरभजन सिंह चौधरी ने अंगदान के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) की वेबसाइट के माध्यम से यह संकल्प लिया है। उनका मानना है कि यह महादान मृत्यु के बाद आठ से अधिक लोगों को नया जीवन दे सकता है।
हरभजन सिंह ने भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद अपने अंगों को चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए निकालने की स्पष्ट अनुमति दी है। उन्होंने बताया कि बीबीएन क्षेत्र में आए दिन हादसे होते रहते हैं। गंभीर मरीजों को अक्सर किडनी और लीवर जैसे अंगों की सख्त जरूरत पड़ती है। इसी विचार से उन्होंने शरीर को मृत्यु के बाद दान करने का निर्णय लिया।
हरभजन सिंह का जन्म 16 जुलाई 1964 को हुआ था। उन्होंने 1984 में नालागढ़ कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी की। वर्ष 1986 में वे पुलिस विभाग में भर्ती हुए और 35 वर्षों तक सराहनीय सेवाएं दीं। 2022 में वे इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वे क्षेत्र के एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में प्रबंधक सेवादार के रूप में जुड़े हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। बद्दी के गुल्लरवाला निवासी सेवानिवृत्त पुलिस इंस्पेक्टर हरभजन सिंह चौधरी ने अंगदान के लिए पंजीकरण कराया है। उन्होंने राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) की वेबसाइट के माध्यम से यह संकल्प लिया है। उनका मानना है कि यह महादान मृत्यु के बाद आठ से अधिक लोगों को नया जीवन दे सकता है।
हरभजन सिंह ने भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद अपने अंगों को चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए निकालने की स्पष्ट अनुमति दी है। उन्होंने बताया कि बीबीएन क्षेत्र में आए दिन हादसे होते रहते हैं। गंभीर मरीजों को अक्सर किडनी और लीवर जैसे अंगों की सख्त जरूरत पड़ती है। इसी विचार से उन्होंने शरीर को मृत्यु के बाद दान करने का निर्णय लिया।
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हरभजन सिंह का जन्म 16 जुलाई 1964 को हुआ था। उन्होंने 1984 में नालागढ़ कॉलेज से स्नातक की शिक्षा पूरी की। वर्ष 1986 में वे पुलिस विभाग में भर्ती हुए और 35 वर्षों तक सराहनीय सेवाएं दीं। 2022 में वे इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद वे क्षेत्र के एक ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब में प्रबंधक सेवादार के रूप में जुड़े हैं।
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