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मिड-डे-मील के लिए तीन महीने से सरकार ने नहीं दिया बजट
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सोलन। प्रदेश के स्कूलों में परोसा जाने वाला मिड-डे मील बंद होने की कगार पर है। आलम यह है पिछले तीन माह से मिड-डे-मील के लिए बजट ही जारी नहीं किया है। फरवरी से उधारी के राशन से मिड-डे-मील चलाया जा रहा है। वहीं अब स्कूल प्रबंधकों ने भी राशन खरीद करने के लिए हाथ खड़े कर दिए है। प्रदेश भर में प्री प्राइमरी से आठवीं तक के बच्चों को दोपहर का भोजन परोसा जा रहा है।
मिड-डे मील में परोसे जाने वाले खाने के लिए नमक, तेल, मिर्च, लहसुन, सब्जी, गर्म मसालों समेत सिलिंडर के लिए बजट आता है। चावल सोसायटी के माध्यम से सरकार स्कूलों तक पहुंचा रही है। पिछले तीन माह से सरकारी विद्यालयों में दोपहर का भोजन अध्यापकों और दुकानदारों की दरियादिली के भरोसे चल रहा है।
सरकार ने बजट जारी नहीं किया है। हर दिन हजारों रुपये का बिल बन रहा है। इसकी तीन महीने से अदायगी नहीं की गई है। अब विद्यालय के अध्यापक या तो खुद की जेब से बच्चों को भोजन करवा रहे हैं या दुकानदार से उधारी कर रहे हैं। इसके चलते मिड-डे मील व्यवस्था हांप रही है।
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शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक दीवान चंदेल ने बताया कि बजट नहीं आया है। अध्यापक जेब से मिड-डे मील का खाना परोस रहे हैं। अब अध्यापकों ने भी इसके लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके बारे में आला अधिकारियों को भी सूचित कर दिया है।
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मिड-डे मील में परोसे जाने वाले खाने के लिए नमक, तेल, मिर्च, लहसुन, सब्जी, गर्म मसालों समेत सिलिंडर के लिए बजट आता है। चावल सोसायटी के माध्यम से सरकार स्कूलों तक पहुंचा रही है। पिछले तीन माह से सरकारी विद्यालयों में दोपहर का भोजन अध्यापकों और दुकानदारों की दरियादिली के भरोसे चल रहा है।
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सरकार ने बजट जारी नहीं किया है। हर दिन हजारों रुपये का बिल बन रहा है। इसकी तीन महीने से अदायगी नहीं की गई है। अब विद्यालय के अध्यापक या तो खुद की जेब से बच्चों को भोजन करवा रहे हैं या दुकानदार से उधारी कर रहे हैं। इसके चलते मिड-डे मील व्यवस्था हांप रही है।
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शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक दीवान चंदेल ने बताया कि बजट नहीं आया है। अध्यापक जेब से मिड-डे मील का खाना परोस रहे हैं। अब अध्यापकों ने भी इसके लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके बारे में आला अधिकारियों को भी सूचित कर दिया है।