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Solan News: पर्यावरण को बचाने का संदेश है गोवर्धन पूजा
Thu, 29 Feb 2024 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Thu, 29 Feb 2024 11:27 PM IST
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कथा में पूतना वध और गोवर्धन पूजा का सुनाया प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। रामशहर के हिमगिरि मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, पूतना वध और गोवर्धन पूजा का वर्णन किया। श्री कृष्ण ने पूतना का वध किया। पूतना अविद्या है। अविद्या नारायण के पास भी जाती है। श्री कृष्ण उदार हैं। विषपान कराने वाले को भी अमृत का दान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि गोवर्धन पूजा पर्यावरण को बचाने और उसका संरक्षण करने कृष्ण द्वारा दिया गया संदेश है। इसे घर-घर तक पहुचाने की आवश्यकता है।
श्रीकृष्ण ने सात वर्ष की आयु में सात कोस के गोवर्धन को अपनी उंगली पर सात दिन तक उठाया। गोवर्धन का एक-एक कण साक्षात कृष्ण है। श्री कृष्ण ने इंद्र के अभिमान को मिटाया और भक्तों में विश्वास प्रकट किया कि संकट के समय घबराना नहीं चाहिए। बल्कि भजन कीर्तन करना चाहिए। सारे बृजवासी गोविंद की शरण में आ गए। जिन्होंने गिरिराज को धारण किया और गिरधारी कहलाए। इस दौरान भक्तों ने गिरिराज की झांकी का दर्शन किया। यजमान करमचंद और उनके परिवार और अन्य लोगों ने गिरिराज की आरती उतारी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़ (सोलन)। रामशहर के हिमगिरि मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा में महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतनानंद ने भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं, पूतना वध और गोवर्धन पूजा का वर्णन किया। श्री कृष्ण ने पूतना का वध किया। पूतना अविद्या है। अविद्या नारायण के पास भी जाती है। श्री कृष्ण उदार हैं। विषपान कराने वाले को भी अमृत का दान करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि गोवर्धन पूजा पर्यावरण को बचाने और उसका संरक्षण करने कृष्ण द्वारा दिया गया संदेश है। इसे घर-घर तक पहुचाने की आवश्यकता है।
श्रीकृष्ण ने सात वर्ष की आयु में सात कोस के गोवर्धन को अपनी उंगली पर सात दिन तक उठाया। गोवर्धन का एक-एक कण साक्षात कृष्ण है। श्री कृष्ण ने इंद्र के अभिमान को मिटाया और भक्तों में विश्वास प्रकट किया कि संकट के समय घबराना नहीं चाहिए। बल्कि भजन कीर्तन करना चाहिए। सारे बृजवासी गोविंद की शरण में आ गए। जिन्होंने गिरिराज को धारण किया और गिरधारी कहलाए। इस दौरान भक्तों ने गिरिराज की झांकी का दर्शन किया। यजमान करमचंद और उनके परिवार और अन्य लोगों ने गिरिराज की आरती उतारी।
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