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कोविड में पुष्प उत्पादन चौपट, कर्जों में दबे उत्पादक
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रमेश ठाकुर
कंडाघाट (सोलन)। फूलों की खेती के लिए मशहूर जिले के चायल क्षेत्र में दो सालों से पुष्प उत्पादन कोरोना की भेंट चढ़ गया। किसान करोड़ों के घाटे में हैं। यहां के पुष्प उत्पादक कर्जों के बोझ तले दब गए हैं। जानकारी के अनुसार चायल सहित दर्जनों क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर बड़े पैमाने पर उत्तम किस्म के देशी और विदेशी किस्मों के फूल उगाए जाते हैं।
इन फूलों से किसानों को अच्छी आमदनी होती थी। पिछले दो सालों से कोरोना के दौर में लॉकडाउन के चलते बंद बाजार, उत्सव न होने और अन्य कारणों से इनकी मांग कम हो गई। यह फूल कौड़ियों के भाव बिक रहा है। दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत पूरी होना तो दूर बीज तक के पैसे पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
बैंकों से लिया है ऋण
चायल के समीप महोग गांव के एक किसान मदन वर्मा ने लिलियम के फूलों का बंच चार सौ से सात सौ रुपये में बिकता था, वह 20 रुपये में भी नहीं बिक रहा है। कारनेशन, गुल दाऊदी और फूल किस्मों के दाम मिले। पिछले दो सालों में इधर फसल तैयार होती है तो उधर कोरोना का लॉकडाउन लग जाता है। फूलों की खेती पर पॉलीहाउस, बीज, खाद, दवाइयों, लेबर सहित उत्पादन खर्च बहुत अधिक है। किसानों को बैंकों से भारी ऋण लेना पड़ता है। पिछले दो सालों से पुष्प उत्पादक किसान कर्जों में डूब रहे हैं।
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आर्थिक सहायता प्रदान करे सरकार
चायल क्षेत्र के पुष्प उत्पादक किसान वीरेंद्र ठाकुर, दिनेश, अशोक कुमार, नंदराम माधोराम, बाबूराम, ओमप्रकाश, आत्म स्वरूप ने बताया कि दो सालों से उनका पुष्प उत्पादन व्यवसाय चौपट हो गया है। सभी किसान गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं। उनके खेतों में बड़े पैमाने पर गुलदाउदी, ग्लैड, लिलियम, एस्टोमेरिया, गेंदा के फूल तैयार हैं जो कौड़ियों के भाव बिक रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश भर के पुष्प उत्पादकों की यही स्थिति है। आर्थिक संकट की घड़ी में सभी पुष्प उत्पादक सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें आर्थिक सहायता दी जाए।
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कंडाघाट (सोलन)। फूलों की खेती के लिए मशहूर जिले के चायल क्षेत्र में दो सालों से पुष्प उत्पादन कोरोना की भेंट चढ़ गया। किसान करोड़ों के घाटे में हैं। यहां के पुष्प उत्पादक कर्जों के बोझ तले दब गए हैं। जानकारी के अनुसार चायल सहित दर्जनों क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर बड़े पैमाने पर उत्तम किस्म के देशी और विदेशी किस्मों के फूल उगाए जाते हैं।
इन फूलों से किसानों को अच्छी आमदनी होती थी। पिछले दो सालों से कोरोना के दौर में लॉकडाउन के चलते बंद बाजार, उत्सव न होने और अन्य कारणों से इनकी मांग कम हो गई। यह फूल कौड़ियों के भाव बिक रहा है। दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत पूरी होना तो दूर बीज तक के पैसे पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
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बैंकों से लिया है ऋण
चायल के समीप महोग गांव के एक किसान मदन वर्मा ने लिलियम के फूलों का बंच चार सौ से सात सौ रुपये में बिकता था, वह 20 रुपये में भी नहीं बिक रहा है। कारनेशन, गुल दाऊदी और फूल किस्मों के दाम मिले। पिछले दो सालों में इधर फसल तैयार होती है तो उधर कोरोना का लॉकडाउन लग जाता है। फूलों की खेती पर पॉलीहाउस, बीज, खाद, दवाइयों, लेबर सहित उत्पादन खर्च बहुत अधिक है। किसानों को बैंकों से भारी ऋण लेना पड़ता है। पिछले दो सालों से पुष्प उत्पादक किसान कर्जों में डूब रहे हैं।
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आर्थिक सहायता प्रदान करे सरकार
चायल क्षेत्र के पुष्प उत्पादक किसान वीरेंद्र ठाकुर, दिनेश, अशोक कुमार, नंदराम माधोराम, बाबूराम, ओमप्रकाश, आत्म स्वरूप ने बताया कि दो सालों से उनका पुष्प उत्पादन व्यवसाय चौपट हो गया है। सभी किसान गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं। उनके खेतों में बड़े पैमाने पर गुलदाउदी, ग्लैड, लिलियम, एस्टोमेरिया, गेंदा के फूल तैयार हैं जो कौड़ियों के भाव बिक रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश भर के पुष्प उत्पादकों की यही स्थिति है। आर्थिक संकट की घड़ी में सभी पुष्प उत्पादक सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें आर्थिक सहायता दी जाए।