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भ्रूण हत्या और गो हत्या समाज के माथे पर कलंक : दुर्वासा
Mon, 20 Nov 2023 11:09 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Mon, 20 Nov 2023 11:09 PM IST
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छठे दिन गोपाष्टमी के अवसर पर बताया गो पूजा का महत्त्व
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। सिद्धपीठ माता जालपा मंदिर महुआ नालागढ़ में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठे दिन गोपाष्टमी के अवसर पर व्यासपीठ पंडित मदनलाल दुर्वासा ने समस्त भक्त जनों के लिए श्री कृष्ण कथा के साथ-साथ समाज में फैल रही कुरीतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से कन्या भ्रूण हत्या और गो माता की हत्या हो रही है वह एक चिंता का विषय है। गोपाष्टमी के महान पर्व पर ही भगवान श्री कृष्ण ने गायों को चराना प्रारंभ किया था। कहा कि एक गाय की सेवा 33 करोड़ देवताओं की पूजा के बराबर का पुण्य देती है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के नंद यशोदा के घर में आने के बहुत सारे कारण थे। नंद यशोदा की पूर्व जन्म की कथा का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया। इसके अतिरिक्त भगवान की बाल लीलाओं में कालिया मर्दन और गोवर्धन पूजा आदि का वर्णन किया गया। गो माता के भजनों को सुनाया। पंडित दुर्वासा ने सभी भक्तजनों से आग्रह किया की सातों दिनों की कथा का पुण्य अर्जित करने के लिए कथा विश्राम के दिन कथा को अवश्य श्रवण करना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। सिद्धपीठ माता जालपा मंदिर महुआ नालागढ़ में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठे दिन गोपाष्टमी के अवसर पर व्यासपीठ पंडित मदनलाल दुर्वासा ने समस्त भक्त जनों के लिए श्री कृष्ण कथा के साथ-साथ समाज में फैल रही कुरीतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जिस तरह से कन्या भ्रूण हत्या और गो माता की हत्या हो रही है वह एक चिंता का विषय है। गोपाष्टमी के महान पर्व पर ही भगवान श्री कृष्ण ने गायों को चराना प्रारंभ किया था। कहा कि एक गाय की सेवा 33 करोड़ देवताओं की पूजा के बराबर का पुण्य देती है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के नंद यशोदा के घर में आने के बहुत सारे कारण थे। नंद यशोदा की पूर्व जन्म की कथा का बहुत ही मार्मिक वर्णन किया। इसके अतिरिक्त भगवान की बाल लीलाओं में कालिया मर्दन और गोवर्धन पूजा आदि का वर्णन किया गया। गो माता के भजनों को सुनाया। पंडित दुर्वासा ने सभी भक्तजनों से आग्रह किया की सातों दिनों की कथा का पुण्य अर्जित करने के लिए कथा विश्राम के दिन कथा को अवश्य श्रवण करना चाहिए।
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