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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Farmers of BBN will grow coarse grain this year

Solan News: बीबीएन के किसान इस वर्ष उगाएंगे मोटा अनाज

Fri, 02 Jun 2023 11:49 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Updated Fri, 02 Jun 2023 11:49 PM IST
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मोटे अनाज में फाइबर की मात्रा होती है ज्यादा
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दूसरे अनाज की अपेक्षा ये स्वास्थ्य के लिए होते हैं फायदेमंद
विभाग 30 फीसदी अनुदान पर किसानों बीज करवाएगा उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी

नालागढ़ (सोलन)। कृषि विभाग नालागढ़ इस बार किसानों को मोटा अनाज तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। पहले वर्ष विभाग ने नालागढ़ विकास खंड में 15 से 20 हेक्टेयर भूमि पर इसे लगाने की योजना बनाई है। मोटे अनाज में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो शुगर और बीपी के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है।

कृषि विभाग नालागढ़ ने एक निजी संस्था के साथ मिलकर किसानों को बाजरा, कोदा, कंगनी, रागी, मंडुवा आदि मोटा अनाज लगाने के लिए अभियान चलाया है। अभियान के तहत हर गांव में चार से पांच किसानों को इसके लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए किसान खरीफ की फसल के साथ भी इसे लगा सकेंगे। मक्की के खेत के किनारों पर बाजरा और कंगनी को लगाया जा सकता है। इसके अलावा इसे अलग से भी खेत में लगाया जा सकता है। इसके लिए पानी की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती है।
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लोदी माजरा के प्रगतिशील किसान अमर चंद ठाकुर ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष से मंडुवा को ट्रायल पर लगाया था जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इस वर्ष वह एक बीघा जमीन पर मंडुवा, बाजरा, कोदा, कंगनी आदि मोटा अनाज लगाएंगे। पहले लोग इस अनाज को बहुत मात्रा में उगाते थे। यह अनाज काफी ताकतवर होता है और इसके खाने में भूख भी कम लगती है।
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उधर, कृषि विभाग के विषय वाद विशेषज्ञ डॉ. प्रेम ठाकुर और कृषि प्रसार अधिकारी डॉ. भोपाल ठाकुर ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार मोटा अनाज को अधिक मात्रा में उगाने के लिए किसानों को प्रेरित कर रही है। इसके तहत विभाग के पास इन अनाजों को बीज उपलब्ध है, और विभाग की ओर से 30 फीसदी अनुदान पर किसानों को बांटा जा रहा है। इस अनाज में रेशे की मात्रा ज्यादा होती है। बीपी और शुगर के रोगियों के लिए यह अनाज फायदेमंद होता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नालागढ़ क्षेत्र में 15 से 20 हेक्टेयर भूमि पर मोटा अनाज लगाने की योजना है।
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