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अवैध खनन पर अंकुश नहीं, नदियां-नाले हो रहे खोखले
ब्यूरो, सोलन
Updated Mon, 06 Feb 2017 12:05 AM IST
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रसूखदारों की छत्रछाया में औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में अवैध खनन के कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा।
- फोटो : अमर उजाला
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रसूखदारों की छत्रछाया में औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में अवैध खनन के कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा। रोजाना अवैध खनन मामले पकड़ में आने के बाद भी खनन माफिया पुलिस और प्रशासन की चौकसी को चुनौती दे रहा है। क्षेत्र की नदियों का सीना छलनी करके बेरोकटोक खनन जारी है। खनन से समतल मैदानों में कई फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं। इससे उपजाऊ भूमि भी बंजर होती जा रही है।
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सरसा नदी, बालद नदी, रता खड्ड, चिकनी खड्ड, कनाहन और लूनस आदि खड्डों में रात के अंधेरे में खनन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। हालांकि प्रशासन अवैध खनन रोकने के लिए कई बार छापेमारी भी करता है लेकिन इसके बावजूद खनन माफिया बाज नहीं आ रहा।
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औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन में कुछ लोग फिश पौंड बनाने के बहाने भी खनन कार्य को अंजाम दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार खनन माफिया से जुडे़ लोग मत्स्य विभाग से मछली पालन के नाम अनुमति लेकर अपनी निजी भूमि में तालाबों का निर्माण करने के नाम पर खनन कर रहे हैं। ऐसे कई गांवों में मछली फार्म के नाम पर अनुमति ली जा रही है। खनन का कार्य समाप्त होने पर वहां मछली फार्म नहीं बनाया जाता। ऐसी शिकायतें प्रशासन को भी मिल चुकी हैं।
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क्षेत्र में ऊबड़ खाबड़ भूमि को समतल करने तथा मकान निर्माण करने के नाम पर अनुमति लेकर भी खनन के कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। खनन माफिया से जुड़े लोग भूमि को समतल करने की अनुमति की आड़ में अपनी निजी भूमि से सामग्री निकालकर उसे ईंट के भट्ठों और निजी क्रशरों को बेचने का कारोबार कर रहे हैं।
प्रशासन समय-समय पर करता है कार्रवाई
एसडीएम नालागढ़ आशुतोष गर्ग ने बताया कि प्रशासन खनन कारोबारियों पर समय-समय पर कार्रवाई करता है। कहा कि प्रशासन शीघ्र ही इस पर विशेष मुहिम चलाकर कार्रवाई करेगा। स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि अगर कोई अवैध खनन का मामला उनके सामने आता है तो उसकी शिकायत करें। जनता के सहयोग और जागरूकता से भी खनन माफिया पर शिकंजा कसा जा सकता है।
प्रशासन कसे शिकंजा : दुखिया
हिम पर्यावरण संरक्षण संस्था के अध्यक्ष जगजीत सिंह दुखिया ने कहा कि क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन से तालाब, कुओं और भूजल का स्तर भी कम हुआ है। अवैध खनन का कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। नदियां दूषित हो रही हैं। पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। समय रहते प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की तो इसके भयावह परिणाम देखने को मिलेंगे। प्रशासन को इस मामले में और सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए।