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नोटबंदी के चलते सैकड़ों बेरोजगारों की दिहाड़ी अटकी
ब्यूरो, सोलन
Updated Sat, 03 Dec 2016 10:32 PM IST
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नोटबंदी के बीच बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के मकसद से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की मनरेगा योजना का सोलन जिला में दम फूलने लगा है।
- फोटो : demo pic
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नोटबंदी के बीच बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के मकसद से केंद्र सरकार द्वारा शुरू की मनरेगा योजना का सोलन जिला में दम फूलने लगा है। बजट न होने से योजना के नियमों के तहत काम करने वालों को 15 दिन के भीतर मजदूरी नहीं मिल पा रही। अव्यवस्था का आलम यह है कि दो माह से सैकड़ों बेरोजगारों को मेहनताना अटका पड़ा है। मेहनताना जारी करने की मांग लिए प्रभावितों को संबंधित कार्यालय में चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के आंकड़े के तहत करीब 2946 श्रमिकों के 85 लाख से अधिक पेमेंट अटकी पड़ी है। इस कारण मजदूरों को भारी परेशानी हो रही है। एक तो नोटबंदी के कारण पहले से ही ग्रामीण परिवेश में आर्थिक परेशानी चल रही है ऊपर से मनरेगा के तहत मेहनताना अदा न होने से ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिला के पांचों ब्लॉक में वर्तमान में सबसे अधिक मेहनताना धर्मपुर ब्लॉक का है। सबसे कम कुनिहार और कंडाघाट का। मनरेगा योजना के तहत हर जॉब कार्ड धारक को 100 दिन का रोजगार अनिवार्य होता है जबकि 172 दिहाड़ी का प्रावधान है।
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कहां कितना बकाया
ब्लाक श्रमिक पेमेंट लाखों में
धर्मपुर 1140 32.60
नालागढ़ 461 14.78
सोलन 522 14.53
कंडाघाट में 377 11.95
कुनिहार 446 11.95
आर्थिक तंगी से हो रही परेशानी
मनरेगा में काम करने वाले मजदूर जीतराम, मुनि लाल, पतराम, नीता देवी और चिंत राम ने बताया कि मनरेगा में फंड न मिलने से मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को अपने घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। नोटबंदी के कारण पहले से ही परेशानी चल रही है। ऊपर से काम करने के बावजूद पैसा नहीं मिलने से लोगों को भारी दिक्कत हो रही है। प्रभावितों ने विभाग से जल्द मेहनताना जारी करने की मांग की है।
जारी होगी मजदूरी : भानू
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के परियोजना अधिकारी भानू गुप्ता ने बताया कि मनरेगा के तहत अब सारी पेमेंट स्टेट लेवल से होती है। स्टेट से फंड न मिलने के कारण मनरेगा की पेमेंट लटकी है। जैसे ही राज्य को केंद्र से मनरेगा में पैसा मिलेगा मजदूरों की पेमेंट जारी कर दी जाएगी।