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सीमेंट उद्योग के गेट पर पुलिस का पहरा, तनाव बढ़ा

Thu, 01 Dec 2016 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन Updated Thu, 01 Dec 2016 11:42 PM IST
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dispute in cement factory in darlaghat
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सीमेंट कंपनी में मजदूरों के निष्कासन के बाद उद्योग के अंदर और बाहर तनाव बढ़ गया है। इसे देखते हुए उद्योग के मुख्य गेट पर पुलिस तैनात करके पहरा सख्त कर दिया है। इसके अलावा मजदूरों से जुड़ी यूनियनें भी इस मुद्दे को लेकर राजनैतिक रोटियां सेंकने में लगी हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रबंधन स्थानीय मजदूरों को निकालकर बाहरी राज्यों के मजदूरों को अंदरखाते से भरती कर रही है।

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इससे तनाव अधिक है। वीरवार को सीमेंट कंपनी के गेट के बाहर मजदूरों ने पुलिस के कड़े पहरे के बीच प्रदर्शन किया। कंपनी प्रबंधन की छंटनी को गैर कानूनी करार देते हुए निकाले गए मजदूरों को वापस काम पर लेने की मांग की है। इस दौरान सीटू के बैनर तले कंपनी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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मजदूरों ने कंपनी पर रिश्तेदारों को फायदा पहचाने के लिए स्थानीय युवाओं के पेट पर लात मारने के आरोप लगाए। यूनियन के प्रधान लछी राम ने बताया कि कंपनी 80 स्थानीय कामगारों को निकालकर 100 नए बाहरी कामगारों की भर्ती कर रही है। इन लोगों ने अपनी पुश्तैनी जमीनें खोई जो स्थानीय लोग भारी प्रदूषण झेल रहे हैं कंपनी उन्हीं से रोजगार छीन रही है।
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वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक तंगी से जूझ रही कंपनी मजदूरों को अकारण बाहर का रास्ता दिखाने में लगी है। उन्होंने कहा कि वीआरएस लेंगे पर अपनी मर्जी से जबरन नहीं। इस दौरान स्थानीय राजनेताओं, विधायक पर आक्रोश प्रकट करते हुए कहा कि वोट के लिए तो राजनेता पहुंचते हैं लेकिन मुसीबत के समय कोई स्थानीय मजदूरों के साथ खड़ा नहीं होता।

बताया कि कंपनी मजदूरों को शरारती तत्व बताकर प्रशासन को भी गुमराह कर रही है। मजदूर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मजदूरों के बीच कोई शरारती तत्व नहीं है। उधर एसडीएम एलआर वर्मा ने कहा कि वह अवकाश पर हैं। उन्हें जानकारी नहीं।

ठेकेदार कर रहे मजदूरों की छंटनी
कंपनी के एचआर विभाग के महाप्रबंधक अविनाश वर्मा ने कहा कि लेबर ठेकेदारों की है। ठेकेदारों के पास वर्क आर्डर के हिसाब से पर्याप्त काम नहीं है। ठेकेदार ही मजदूरों की छंटनी कर रहे हैं। श्रम नियमों के हिसाब से ठेकेदार द्वारा निकाले गए मजदूरों को मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है। भूमिहीन मजदूरों के निकाले जाने की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच होगी।

स्थानीय विधायक और प्रशासन पर निशाना
वक्ताओं ने इस दौरान स्थानीय विधायक और प्रशासन से मामले में दखल देने की मांग की। उधर कंपनी प्रभावित किसान एवं मजदूर सभा भी मजदूरों की छंटनी के विरोध में उतर गई है। सभा के संयोजक जगदीश शर्मा ने बताया कि कंपनी द्वारा सरकार के साथ साइन किए एमओयू में प्रभावित स्थानीय युवाओं और 70 प्रतिशत हिमाचलियों को रोजगार देने की बात को कबूला है।

प्लांटों की स्थापना के समय सरकार से मिली भारी भरकम सब्सिडी डकारने के बाद अब कंपनी एमओयू के खिलाफ काम कर रही है। 70 प्रतिशत हिमाचलियों को रोजगार देना तो दूर की बात जो थोड़े बहुत स्थानीय युवा कंपनी में लगे भी थे उन्हें


भी निकाल कर बाहरी राज्यों के कामगारों को रखा जा रहा है। यह स्थानीय लोगों के साथ धोखा है। प्रशासन और राजनेताओं पर अदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि कि स्थानीय युवाओं को उनका हक दिलवाने के लिए सभा इस मुद्दे पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।

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