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Solan News: नौणी विवि में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन के लिए कृषि वानिकी की क्षमता पर चर्चा
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। कृषि वानिकी पर अखिल भारतीय समंवित अनुसंधान परियोजना की वार्षिक समूह बैठक नौणी विवि में संपन्न हुई। यह बैठक विश्वविद्यालय ने एआईसीआरपी एग्रोफॉरेस्ट्री और सेंट्रल एग्रोफॉरेस्ट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट झांसी के सहयोग से आयोजित की गई। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम ने देश में कृषि-वानिकी अनुसंधान और कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य किया। बैठक में कृषि वानिकी के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए देश भर के विशेषज्ञ एक साथ एक मंच पर एकत्रित हुए। इस आयोजन में पांच तकनीकी सत्र शामिल था। समापन सत्र में कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने वैज्ञानिकों से किसानों को कृषि वानिकी के लाभों के बारे में शिक्षित करते समय पारिस्थितिक मापदंडों को शामिल करने का आग्रह किया। चर्चाओं में जलवायु परिवर्तन शमन में कृषि वानिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया, जिसमें कार्बन को सोखने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और स्थायी भूमि उपयोग प्रथाओं को बढ़ावा देने की क्षमता शामिल है। विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य को बढ़ाने, खराब भूमि को पुन: प्राप्त करने और चारे और जैविक उर्वरकों के स्थायी स्रोत प्रदान करने जैसी विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिजाइन की गई कृषि वानिकी प्रणालियों का उल्लेख किया।
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सोलन। कृषि वानिकी पर अखिल भारतीय समंवित अनुसंधान परियोजना की वार्षिक समूह बैठक नौणी विवि में संपन्न हुई। यह बैठक विश्वविद्यालय ने एआईसीआरपी एग्रोफॉरेस्ट्री और सेंट्रल एग्रोफॉरेस्ट्री रिसर्च इंस्टीट्यूट झांसी के सहयोग से आयोजित की गई। इस तीन दिवसीय कार्यक्रम ने देश में कृषि-वानिकी अनुसंधान और कार्यान्वयन को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य किया। बैठक में कृषि वानिकी के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए देश भर के विशेषज्ञ एक साथ एक मंच पर एकत्रित हुए। इस आयोजन में पांच तकनीकी सत्र शामिल था। समापन सत्र में कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने वैज्ञानिकों से किसानों को कृषि वानिकी के लाभों के बारे में शिक्षित करते समय पारिस्थितिक मापदंडों को शामिल करने का आग्रह किया। चर्चाओं में जलवायु परिवर्तन शमन में कृषि वानिकी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया, जिसमें कार्बन को सोखने, जैव विविधता को बढ़ावा देने और स्थायी भूमि उपयोग प्रथाओं को बढ़ावा देने की क्षमता शामिल है। विशेषज्ञों ने मृदा स्वास्थ्य को बढ़ाने, खराब भूमि को पुन: प्राप्त करने और चारे और जैविक उर्वरकों के स्थायी स्रोत प्रदान करने जैसी विशिष्ट चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिजाइन की गई कृषि वानिकी प्रणालियों का उल्लेख किया।