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परवाणू, बीबीएन के उद्योगों पर बिजली की मार, ट्रक भाड़ा भी बढ़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, परवाणु सोलन
Updated Wed, 01 Jun 2016 11:03 PM IST
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मंदी की मार झेल रहे उद्यमियों को इस बार बिजली का बिल झटका देने वाला होगा।
- फोटो : अमर उजाला
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मंदी की मार झेल रहे उद्यमियों को इस बार बिजली का बिल झटका देने वाला होगा। बीबीएन, परवाणू और सोलन के उद्योगों पर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली के डिमांड चार्जेज बढ़ा दिए हैं। सोलन जिला में इसका सीधा असर करीब पांच हजार छोटे और बड़े उद्योगों पर पड़ेगा। इस फैसले से उद्योग जगत में हलचल मची हुई है।
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उद्यमियों का कहना है कि एक तरफ तो प्रचार किया रहा है कि बिजली की दरें नहीं बढ़ाई लेकिन दूसरी तरफ डिमांड चार्जेज बढ़ाकर उद्यमियों पर अतिरिक्त भार डाला जा रहा है। औद्योगिक संघ ने सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की गुहार लगाई है। विकल्प बताते हुए तुरंत प्रभाव से इसमें सब्सिडी के प्रावधान की मांग की है। उद्योगपतियों का कहना है कि डिमांड चार्जिज बढ़ने से छोटे उद्योगों को प्रतिमाह बिजली के बिल में 3 से 5 प्रतिशत की अनुमानित बढ़ोतरी होगी।
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बड़े उद्यमियों पर लाखों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। सरकार ने 2014 -15 के टैरिफ आदेश में कहा था की भविष्य में डिमांड चार्जेज नहीं बढ़ेंगे बल्कि कम होंगे। जबकि नए टैरिफ में सब उल्टा है । बोर्ड के अधीक्षण अभियंता धीरज मित्तल ने कहा कि आयोग से जिस तरह के निर्देश आएंगे उस तरह से अमल होगा।
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20 से 75 रुपये प्रति केबीए प्रति माह बढ़ोतरी
परवाणू औद्योगिक संघ के प्रधान अनिल सहगल, सचिव राकेश बंसल और पूर्व प्रधान अलोक शर्मा ने कहा कि राज्य विद्युत नियामक आयोग ने डिमांड चार्जेज में 20 से 75 रुपये प्रति केबीए की बढ़ोतरी की है। हाल ही में राज्य विद्युत नियामक ने प्रदेश में नया टैरिफ जारी किया है जिसमें उद्योगों के बिजली की दरें तो नहीं बढ़ाई हैं, लेकिन डिमांड चार्जेज में 20 से लेकर 75 रुपये तक प्रति केबीए/ प्रति माह की दर से बढ़ा दिया है ।
यह रहेगी दरें
मध्यम उद्योग 20 रूपए
एचटी वाले बड़े उद्योग 50 रूपए
ईएचटी वाले विशाल उद्योग 75 रूपए
यह कैसी दरें की फ्रीज, झेलना होगा नुकसान
संघ का कहना है की प्रदेश में नया निवेश आकर्षित करने के लिय राज्य सरकार ने रोड शो कर रहा है। दावे किए जा रहें है कि 5 साल के लिए उद्योगों की बिजली की दरें फ्रीज कर दी गई हैं। लेकिन नियामक आयोग का यह कदम सरकार के दावों के विपरीत है। संघ के सदस्यों ने कहा की डिमांड चार्जिज बढने से जहां राज्य में नए निवेश पर भारी असर पड़ेगा। वहीं पहले ही आर्धिक मंदी से गुजर रहे मौजूदा उद्योगों को भी भारी नुकसान होगा ।
यह हैं डिमांड चार्जेस
उद्योग बोर्ड से बिजली के लोड की डिमांड करती है। उदाहरण के तौर पर एक उद्योग में 10 केबीए की आवश्यकता रहती है। बोर्ड से उद्योग संचालक इस लोड की मांग करते हैं। उस लोड को बिजली बोर्ड पूरा करता है। डिमांड पर बिजली बोर्ड चार्जेस वसूल करता है। हर माह के मासिक बिल में यह डिमांर्ड चार्जेस जुड़कर आतेे हैं। इससे कम बिजली खर्च करने पर डिमांड चार्जेस उतने ही लगते हैं, लेकिन अधिक खर्च करने पर जुर्माना अदा करना पड़ता है।
ट्रकों का भाड़ा भी बढ़ा
उद्योगों में बिजली पर डिमांड चार्जेज बढ़ने के बाद बुधवार को ट्रक भाड़े में पांच फीसदी बढ़ोतरी कर दी गई। इससे उद्यमियों को दोहरा झटका लगा है। डीजल की कीमत 2.36 रुपये बढ़ने से परवाणू ट्रक यूनियन ने किराए भाड़े में पांच फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है। यह बढ़ोतरी बुधवार से लागू हो गई है। इसका असर परवाणू के करीब सैकड़ों उद्योगों पर पड़ेगा।
पहले पहली अप्रैल को भी पांच फीसदी बढ़ोतरी की गई थी। इसकी पुष्टि ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबा हरदीप सिंह ने की है। केंद्र सरकार द्वारा डीजल के दाम बढ़ाए जाने के चलते किराया भाड़ा बढ़ाया गया है। परवाणू इंडस्ट्री एसोसिएशन, ट्रांस्पोर्टर एसोसिएशन ने इस बढ़ोतरी पर सहमती दे दी है। अप्रैल से लेकर पहली जून तक कुल 3.84 रुपए रेट बढ़ा है। लिहाजा नियमानुसार पांच फीसदी की बढ़ोतरी करनी पड़ी है।
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