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Solan News: चतुर्मास की महिमा, सेवा का दिया संदेश
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कुनिहार के तुलसी कुटरी आनंद आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। तुलसी कुटीर आनंद आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा का बुधवार को समापन हो गया। कथा व्यास भगत राम नड्डा ने श्रद्धालुओं को चतुर्मास का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि यह काल आत्मचिंतन, साधना, संयम और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान किए गए जप-तप, दान, व्रत, सत्संग और सेवा का कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी तक चलने वाले चतुर्मास में भगवान विष्णु योगनिंद्रा में रहते हैं। इस अवधि में संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर धर्म प्रचार, कथा-प्रवचन और जनकल्याण के कार्य करते हैं। श्रद्धालुओं को भी इस समय अपने जीवन में सदाचार, सत्य, करुणा, सेवा और संयम को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाते हैं। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का स्मरण, सत्संग, कथा-श्रवण और जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान किया।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार (सोलन)। तुलसी कुटीर आनंद आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं श्री द्वादश ज्योतिर्लिंग कथा का बुधवार को समापन हो गया। कथा व्यास भगत राम नड्डा ने श्रद्धालुओं को चतुर्मास का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि यह काल आत्मचिंतन, साधना, संयम और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान किए गए जप-तप, दान, व्रत, सत्संग और सेवा का कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है।
देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी तक चलने वाले चतुर्मास में भगवान विष्णु योगनिंद्रा में रहते हैं। इस अवधि में संत-महात्मा एक स्थान पर रहकर धर्म प्रचार, कथा-प्रवचन और जनकल्याण के कार्य करते हैं। श्रद्धालुओं को भी इस समय अपने जीवन में सदाचार, सत्य, करुणा, सेवा और संयम को अपनाने का प्रयास करना चाहिए। गुरु ही मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाते हैं। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का स्मरण, सत्संग, कथा-श्रवण और जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान किया।
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बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।