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पीलिया को लेकर कब्जे में लिया आईपीएच और नप का रिकार्ड
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
Updated Wed, 16 Mar 2016 10:23 PM IST
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पीलिया के मामले में शिकंजा कसते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। बुधवार को पुलिस ने नगर परिषद और आईपीएच का रिकार्ड कब्जे में लेने की कवायद शुरू की। संबंधित विभागों में जाकर पुलिस रिकार्ड कब्जे में ले रही है। इसमें जनवरी माह से पानी की सैंपलिंग और उसकी रिपोर्ट की हर पहलु से जांच की जाएगी। पीलिया के ग्रस्त रोगियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। जांच के बाद पूरे मामले में जिस-जिस अधिकारी की कोताही सामने आएगी, उसकी जिम्मेदारी तय करते हुए पुलिस विभाग कार्रवाई करेगा।
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पुलिस की इस कवायद से आईपीएच और नगर परिषद के अधिकारियों के हाथ पांव फूले हुए हैं। राजधानी शिमला में कई अधिकारियों की गिरफ्तारियों की कार्रवाई के बाद इसी तरह की कार्रवाई का डर अफसरों को भी सता रहा है। शनिवार को पुलिस ने पीलिया के मामले में शिमला की तर्ज पर एफआईआर दर्ज की थी।
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मंगलवार को हो चुकी है पूछताछ
मंगलवार को पुलिस ने आईपीएच के अधिशासी अभियंता, एसडीओ, जेई समेत नप के कार्यकारी अधिकारी को पूछताछ के लिए एसपी कार्यालय में तलब किया गया था। बताया जा रहा है कि आरोपियों से इस मामले में गहन छानबीन की गई। साथ ही पानी की सैंपलिंग, रिपोर्ट और अन्य संबंधित मुद्दों पर जवाब तलब किए गए। जल्द ही दोबारा इस तरह की पूछताछ पुलिस विभाग आरोपियों से कर सकता है।
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714 के करीब पहुंचे मामले
अब तक सोलन जिला में 1 जनवरी से अब तक 714 से अधिक मामले पीलिया के मामले आ चुके हैं। तीन मौतें भी हुई हैं। लेकिन यह मौतें गंभीर बीमारी से त्रस्त रोगी को पीलिया होने से हुई है। सबसे अधिक मामले सोलन शहर और धर्मपुर के सामने आए हैं। हालांकि बीबीएन, अर्की, कुनिहार के भी कई मामले सामने आए हैं।
पहले मुकरता रहा प्रशासन फिर अश्वनी पर प्रतिबंध
‘अमर उजाला’ ने पीलिया के मामले उजागर होने के बाद प्रशासन और विभाग को ट्रीटमेंट प्लांटों के हालात के बारे में सचेत किया था। ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से अश्वनी समेत अन्य योजनाओं के इर्द गिर्द सफाई व्यवस्था की बदहाली की तस्वीर सामने रखी। लेकिन पीलिया के मामलों को रूटीन करार देते हुए विभाग इस पर पर्दा डालता रहा। एकाएक मामले अधिक होने से 24 जनवरी के बाद अश्वनी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। कुछ कांग्रेस के स्थानीय नेता भी इस पूरे प्रकरण में विभाग का साथ देते नजर आए और पानी को पीने योग्य करार देते रहे। लेकिन पीलिया के मामले सामने आना बंद नहीं हुए। इसके बाद पुणे संस्थान के सैंपल भी फेल हो गए। तब से लेकर अब तक अश्वनी के पानी पर प्रतिबंध है।
क्यों नहीं लगाई पाबंदी
शिमला में 4 जनवरी से अश्वनी के पानी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन सोलन में इस पानी पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया। जिम्मेदार अधिकारियों का तर्क था कि अश्वनी से सोलन की दूरी 30 से 35 किमी है, इतनी दूरी से आते आते पानी छन कर अपने आप साफ हो जाता है। हालांकि माइक्रोबायोलॉजिस्ट वैज्ञानिक रूप से इसे नकारते रहे।
डीएसपी ने पीड़ित परिवारों से की अपील
जांच अधिकारी डीएसपी अमित शर्मा ने पीलिया से पीड़ित रोगियों को पुलिस में बयान दर्ज करने की अपील की है। बताया प्रभावित व्यक्ति सामने आकर बयान दें, जिससे की पुलिस निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कोताही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय करें। कहा कि आईपीएच और नप का रिकार्ड कब्जे में लेने की कवायद शुरू हो गई है। अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होगा।
सीएमओ बोले विभाग कर रहा मदद
सीएमओ डॉ. आरके दरोच ने कहा कि पुलिस विभाग को जिस भी रिकार्ड की जरूरत पड़ रही है, मुहैया करवाया जा रहा है। कहा कि पारदर्शिता से अस्पताल में कार्य हुए हैं। अब तक के मरीजों का आंकड़ा, पीड़ितों के पते के अलाव पीलिया की रोकथाम के उपायों पर किए प्रयासों की जानकारी एसआइटी को सौंपी जा चुकी है।