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Solan News: बद्दी में हुईं दंपती आयाम गतिविधियां
Sun, 21 Apr 2024 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 21 Apr 2024 11:51 PM IST
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बद्दी के महाराणा प्रताप नगर में आयोजित सोलह संस्कार कार्यक्रम में मौजूद नव दंपति। संंवाद
21 नव दंपतियों ने जाना वैदिक 16 संस्कार का महत्व
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के अंतर्गत सोलन विभाग का नवदंपति कार्यक्रम महाराणा प्रताप नगर बद्दी में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रांत संयोजक धर्मपाल उपस्थित रहे। जबकि अध्यक्षता बद्दी के वरिष्ठ समाजसेवी हंसराज भारद्वाज ने की। मुख्यवक्ता ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में 16 संस्कार पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रमाणिकता पर आधारित हैं। इसमें गर्भ संस्कार से लेकर अंत्येष्टि तक का पूरा मनुष्य जीवन का विधान बताया गया है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में 16 संस्कारों में गर्भाधान पहला है। दूसरा पुंसवन गर्भस्थ शिशु के मानसिक विकास, तीसरा सीमंतोन्नयन संतान का सौभाग्य संपन्न होना। वहीं चौथा जातकर्म नवजात शिशु के नालच्छेदन से पूर्व इस संस्कार को करने का विधान है। पांचवां नामकरण जन्म के 11वें दिन यह संस्कार होता है। छठा निष्क्रमण दीर्घकाल तक धर्म और मर्यादा की रक्षा करते हुए इस लोक का भोग करें। सातवां अन्नप्राशन संस्कार का उद्देश्य शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। आठवां चूड़ाकर्म शुचिता और बौद्धिक विकास की परिकल्पना के लिए है। नौवां विद्यारंभ, 10वां कर्णवेध, 11वां यज्ञोपवीत, 12वां वेदारंभ, 13वां केशांत, 14वां समावर्तन, 15वां विवाह और 16वां अन्त्येष्टि हैं।
उन्होंने सभी दंपतियों से जीवन में पांच शील धारण करने का मंत्र दिया। इस अवसर पर कंचन, चंदा केशतवाल, जिला कार्यवाह श्रवण चंदेल, जिला संयोजक विष्णु गौतम, नगर संयोजक धीरज कुमार, विभाग गो सेवा प्रमुख नवीन शर्मा, नगर कार्यवाह रालुल कुमार, सहनगर कार्यवाह यशकर, अंजना, अर्चना आदि मौजूद रहे ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। कुटुंब प्रबोधन गतिविधि के अंतर्गत सोलन विभाग का नवदंपति कार्यक्रम महाराणा प्रताप नगर बद्दी में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर प्रांत संयोजक धर्मपाल उपस्थित रहे। जबकि अध्यक्षता बद्दी के वरिष्ठ समाजसेवी हंसराज भारद्वाज ने की। मुख्यवक्ता ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में 16 संस्कार पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रमाणिकता पर आधारित हैं। इसमें गर्भ संस्कार से लेकर अंत्येष्टि तक का पूरा मनुष्य जीवन का विधान बताया गया है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में 16 संस्कारों में गर्भाधान पहला है। दूसरा पुंसवन गर्भस्थ शिशु के मानसिक विकास, तीसरा सीमंतोन्नयन संतान का सौभाग्य संपन्न होना। वहीं चौथा जातकर्म नवजात शिशु के नालच्छेदन से पूर्व इस संस्कार को करने का विधान है। पांचवां नामकरण जन्म के 11वें दिन यह संस्कार होता है। छठा निष्क्रमण दीर्घकाल तक धर्म और मर्यादा की रक्षा करते हुए इस लोक का भोग करें। सातवां अन्नप्राशन संस्कार का उद्देश्य शिशु के शारीरिक व मानसिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। आठवां चूड़ाकर्म शुचिता और बौद्धिक विकास की परिकल्पना के लिए है। नौवां विद्यारंभ, 10वां कर्णवेध, 11वां यज्ञोपवीत, 12वां वेदारंभ, 13वां केशांत, 14वां समावर्तन, 15वां विवाह और 16वां अन्त्येष्टि हैं।
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उन्होंने सभी दंपतियों से जीवन में पांच शील धारण करने का मंत्र दिया। इस अवसर पर कंचन, चंदा केशतवाल, जिला कार्यवाह श्रवण चंदेल, जिला संयोजक विष्णु गौतम, नगर संयोजक धीरज कुमार, विभाग गो सेवा प्रमुख नवीन शर्मा, नगर कार्यवाह रालुल कुमार, सहनगर कार्यवाह यशकर, अंजना, अर्चना आदि मौजूद रहे ।
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