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Solan News: शूलिनी मेले में रोमांचक ठोडा खेल मात्र चार अंकों के अंतर से चायल बना विजेता
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ठोडो मैदान सोलन में पारंपरिक ठोडा प्रतियोगिता में खेलते विभिनन प्रतिभागी। संवाद
दर्शकों ने उठाया महाभारत कालीन युद्ध शैली का आनंद,ठोडो मैदान में पाशी और शाठी दलों के बीच चले खूब तीर
जिला सिरमौर, शिमला और ठियोग की छह टीमों ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। महाभारत काल की ऐतिहासिक युद्ध शैली को संजोए ठोडा नृत्य व खेल शनिवार को ऐतिहासिक ठोडो मैदान में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। जिला सोलन के प्रसिद्ध मां शूलिनी मेले के अवसर पर आयोजित इस पारंपरिक खेल में सिरमौर, शिमला और ठियोग की टीमों के बीच तीर-कमान का कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला।
प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला पजाईक शिमला और चायल की टीम के बीच खेला गया। पूरे मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। अंतत बेहद रोमांचक मोड़ पर चायल की टीम ने 56-52 के स्कोर से मुकाबला अपने नाम कर लिया। विजेता और उपविजेता टीम के बीच मात्र 4 अंकों का अंतर रहा, जिसने मैदान में मौजूद दर्शकों की सांसें थामे रखीं। इस प्रतियोगिता में कुल 6 प्रमुख टीमों ने अपनी युद्ध कला का प्रदर्शन किया। इसमें हिमरी ठोडा दल, शाठी ठोडा दल (सिरमौर), पाशी ठोडा दल, सरी (चौपाल), चायल ठोडा दल, ठोडा दल मदरेना, पीरन ठोडा दल शामिल रहा। इससे पूर्व सभी टीमों ने भी पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
परंपरा और नियमों का अनूठा संगम
ठोडो कमेटी के सदस्य अनिल ने बताया कि यह खेल सतयुग और महाभारत काल से चला आ रहा है, जो पाशी और शाठी दो पारंपरिक दलों के बीच खेला जाता है। खिलाड़ी विशेष लिबास के साथ तीर-कमान, ढांगरू, सिलारा और डागरा से लैस होते हैं तथा पैरों की सुरक्षा के लिए चमड़े के भारी जूते पहनते हैं। इस खेल में तीर सिर्फ घुटने से नीचे मारा जाता है। पैर पर तीर मारना फाउल माना जाता है।
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पहली बार ठोडो मैदान में ही किया नृत्य
खेल में इस्तेमाल होने वाले तीर विशेष रूप से चांव की लकड़ी से तैयार किए जाते हैं, ताकि खिलाड़ियों को गंभीर चोट न आए। शनिवार दोपहर ठीक 12:41 बजे सभी दल पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और शहनाई की धुनों पर थिरकते हुए जैसे ही ठोडो मैदान पहुंचे, पूरा परिसर दर्शकों की भारी भीड़ से सराबोर हो गया। पूरे दिन चले इस पारंपरिक युद्ध नृत्य का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। हालांकि पहली बार ऐसा हुआ है कि यह टीमें सीधे ठोडो मैदान में पहुंची। पहले यह टीमें ठोडा नृत्य के साथ मुरारी मार्केट से शुरू होती थी, जिसके बाद मालरोड होते ठोडो मैदान पहुंचती थी।
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जिला सिरमौर, शिमला और ठियोग की छह टीमों ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। महाभारत काल की ऐतिहासिक युद्ध शैली को संजोए ठोडा नृत्य व खेल शनिवार को ऐतिहासिक ठोडो मैदान में आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। जिला सोलन के प्रसिद्ध मां शूलिनी मेले के अवसर पर आयोजित इस पारंपरिक खेल में सिरमौर, शिमला और ठियोग की टीमों के बीच तीर-कमान का कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखने को मिला।
प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला पजाईक शिमला और चायल की टीम के बीच खेला गया। पूरे मैच के दौरान दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। अंतत बेहद रोमांचक मोड़ पर चायल की टीम ने 56-52 के स्कोर से मुकाबला अपने नाम कर लिया। विजेता और उपविजेता टीम के बीच मात्र 4 अंकों का अंतर रहा, जिसने मैदान में मौजूद दर्शकों की सांसें थामे रखीं। इस प्रतियोगिता में कुल 6 प्रमुख टीमों ने अपनी युद्ध कला का प्रदर्शन किया। इसमें हिमरी ठोडा दल, शाठी ठोडा दल (सिरमौर), पाशी ठोडा दल, सरी (चौपाल), चायल ठोडा दल, ठोडा दल मदरेना, पीरन ठोडा दल शामिल रहा। इससे पूर्व सभी टीमों ने भी पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
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परंपरा और नियमों का अनूठा संगम
ठोडो कमेटी के सदस्य अनिल ने बताया कि यह खेल सतयुग और महाभारत काल से चला आ रहा है, जो पाशी और शाठी दो पारंपरिक दलों के बीच खेला जाता है। खिलाड़ी विशेष लिबास के साथ तीर-कमान, ढांगरू, सिलारा और डागरा से लैस होते हैं तथा पैरों की सुरक्षा के लिए चमड़े के भारी जूते पहनते हैं। इस खेल में तीर सिर्फ घुटने से नीचे मारा जाता है। पैर पर तीर मारना फाउल माना जाता है।
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पहली बार ठोडो मैदान में ही किया नृत्य
खेल में इस्तेमाल होने वाले तीर विशेष रूप से चांव की लकड़ी से तैयार किए जाते हैं, ताकि खिलाड़ियों को गंभीर चोट न आए। शनिवार दोपहर ठीक 12:41 बजे सभी दल पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और शहनाई की धुनों पर थिरकते हुए जैसे ही ठोडो मैदान पहुंचे, पूरा परिसर दर्शकों की भारी भीड़ से सराबोर हो गया। पूरे दिन चले इस पारंपरिक युद्ध नृत्य का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया। हालांकि पहली बार ऐसा हुआ है कि यह टीमें सीधे ठोडो मैदान में पहुंची। पहले यह टीमें ठोडा नृत्य के साथ मुरारी मार्केट से शुरू होती थी, जिसके बाद मालरोड होते ठोडो मैदान पहुंचती थी।

ठोडो मैदान सोलन में पारंपरिक ठोडा प्रतियोगिता में खेलते विभिनन प्रतिभागी। संवाद