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Solan News: पाइनग्रोव स्कूल में सीबीएसई क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। पाइनग्रोव स्कूल धर्मपुर में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा आधारभूत चरण विषय पर एक दिवसीय सीबीएसई क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता सीबीएसई विशेषज्ञ सुनील कुमार काला और रीमा बाथला ने की। पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर आधारित इस कार्यक्रम में पाइनग्रोव समेत एंजल्स वैली स्कूल राजपुरा, चैपस्ली स्कूल शिमला, गुरुकुल स्कूल सोलन के कुल 59 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रेरणा और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 की प्रगतिशील सोच को आधार बनाते हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केंद्रित कर ऐसी शिक्षा को बढ़ावा देना था जो खेल और अनुभवों के माध्यम से उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करे। इसमें बुनियादी साक्षरता और गणना कौशल को रोचक और अर्थपूर्ण तरीकों से सिखाने पर जोर दिया गया ताकि छोटे बच्चों को आयु और विकास के अनुरूप शिक्षा दी जा सके। प्रतिभागियों को संवाद और सहयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से यह समझने का अवसर मिला कि शुरुआती वर्षों की शिक्षा को कैसे ज्यादा प्रभावशाली, समावेशी और आज के दौर में बच्चों की आवश्यकता से जोड़ा जा सकता है।
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सोलन। पाइनग्रोव स्कूल धर्मपुर में राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा आधारभूत चरण विषय पर एक दिवसीय सीबीएसई क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता सीबीएसई विशेषज्ञ सुनील कुमार काला और रीमा बाथला ने की। पाठ्यचर्या की रूपरेखा पर आधारित इस कार्यक्रम में पाइनग्रोव समेत एंजल्स वैली स्कूल राजपुरा, चैपस्ली स्कूल शिमला, गुरुकुल स्कूल सोलन के कुल 59 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की प्रेरणा और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 की प्रगतिशील सोच को आधार बनाते हुए इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को केंद्रित कर ऐसी शिक्षा को बढ़ावा देना था जो खेल और अनुभवों के माध्यम से उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करे। इसमें बुनियादी साक्षरता और गणना कौशल को रोचक और अर्थपूर्ण तरीकों से सिखाने पर जोर दिया गया ताकि छोटे बच्चों को आयु और विकास के अनुरूप शिक्षा दी जा सके। प्रतिभागियों को संवाद और सहयोगात्मक गतिविधियों के माध्यम से यह समझने का अवसर मिला कि शुरुआती वर्षों की शिक्षा को कैसे ज्यादा प्रभावशाली, समावेशी और आज के दौर में बच्चों की आवश्यकता से जोड़ा जा सकता है।