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Solan News: हिरोशिमा दिवस पर साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष का आह्वान
Fri, 07 Aug 2026 11:00 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Fri, 07 Aug 2026 11:00 PM IST
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स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की ओर से राजकीय महाविद्यालय सोलन में आयोजित हिरोशिमा दिवस
सोलन कॉलेज की एसएफआई इकाई ने किया सेमिनार का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की सोलन इकाई ने हिरोशिमा दिवस पर एक सेमिनार का आयोजन किया। इस दौरान संगठन ने साम्राज्यवाद, युद्धोन्माद और सैन्य आक्रामकता का कड़ा विरोध किया। एसएफआई ने विश्व शांति और मानवता की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
6 अगस्त 1945 को अमेरिकी परमाणु हमले ने जापान के हिरोशिमा शहर को तबाह कर दिया था। इस हमले में हजारों निर्दोष नागरिक मारे गए और लाखों लोग विकिरण के दुष्प्रभावों से पीड़ित हुए। एसएफआई इसे मानव इतिहास का एक भयावह युद्ध अपराध और मानवता का नरसंहार मानती है। संगठन का कहना है कि आज भी शक्तिशाली देश युद्ध, सैन्य हस्तक्षेप और आर्थिक दबाव से कमजोर राष्ट्रों पर वर्चस्व स्थापित कर रहे हैं। एसएफआई अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व पर जोर देती है।
वर्तमान में अमेरिका और इस्राइल की नीतियों को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर बहस और आलोचना हो रही है। गाजा सहित कई क्षेत्रों में जारी सैन्य कार्रवाइयों से भारी मानवीय संकट पैदा हुआ है। एसएफआई निर्दोष नागरिकों की मौत, युद्ध और दमन की हर कार्रवाई की निंदा करती है। संगठन ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने की अपील की।
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वैश्विक महाशक्तियों के बीच बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और हथियारों की होड़ दुनिया को नए युद्धों की ओर धकेल रही है। एसएफआई ने देश के छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक शक्तियों से आह्वान किया है कि उन्हें साम्राज्यवाद, युद्धोन्माद और परमाणु हथियारों की राजनीति के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की सोलन इकाई ने हिरोशिमा दिवस पर एक सेमिनार का आयोजन किया। इस दौरान संगठन ने साम्राज्यवाद, युद्धोन्माद और सैन्य आक्रामकता का कड़ा विरोध किया। एसएफआई ने विश्व शांति और मानवता की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
6 अगस्त 1945 को अमेरिकी परमाणु हमले ने जापान के हिरोशिमा शहर को तबाह कर दिया था। इस हमले में हजारों निर्दोष नागरिक मारे गए और लाखों लोग विकिरण के दुष्प्रभावों से पीड़ित हुए। एसएफआई इसे मानव इतिहास का एक भयावह युद्ध अपराध और मानवता का नरसंहार मानती है। संगठन का कहना है कि आज भी शक्तिशाली देश युद्ध, सैन्य हस्तक्षेप और आर्थिक दबाव से कमजोर राष्ट्रों पर वर्चस्व स्थापित कर रहे हैं। एसएफआई अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व पर जोर देती है।
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वर्तमान में अमेरिका और इस्राइल की नीतियों को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर बहस और आलोचना हो रही है। गाजा सहित कई क्षेत्रों में जारी सैन्य कार्रवाइयों से भारी मानवीय संकट पैदा हुआ है। एसएफआई निर्दोष नागरिकों की मौत, युद्ध और दमन की हर कार्रवाई की निंदा करती है। संगठन ने सभी देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून, मानवाधिकारों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने की अपील की।
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वैश्विक महाशक्तियों के बीच बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा और हथियारों की होड़ दुनिया को नए युद्धों की ओर धकेल रही है। एसएफआई ने देश के छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक शक्तियों से आह्वान किया है कि उन्हें साम्राज्यवाद, युद्धोन्माद और परमाणु हथियारों की राजनीति के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए।