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इंतजार में छात्र, यहां स्टोर में धूल फांक रही बच्चों की मुफ्त किताबें

Wed, 18 May 2016 11:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन
ब्यूरो/अमर उजाला, सोलन Updated Wed, 18 May 2016 11:28 PM IST
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book not send in school
छठी और सातवीं कक्षा तक मुफ्त किताबें पहुंचाए जाने के शिक्षा विभाग के दावे जमीनी स्तर पर खरे नहीं उतरे हैं। - फोटो : अमर उजाला

छठी और सातवीं कक्षा तक मुफ्त किताबें पहुंचाए जाने के शिक्षा विभाग के दावे जमीनी स्तर पर खरे नहीं उतरे हैं। मई माह आधा बीत जाने के बावजूद भी शहर और आसपास के स्कूलों में मुफ्त किताबें वितरित नहीं हुई हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी आश्वस्त हैं कि फ्री किताबें स्कूलों में विद्यार्थियों तक पहुंच चुकी हैं। लेकिन ‘अमर उजाला’ की ग्राउंड रिपोर्ट की वास्तविक स्थिति इससे काफी विपरीत है।

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शहर और आसपास के ही स्कूलों में किताबें नहीं बंटी हैं तो दूर दराज के क्षेत्रों का अंदाजा लगाया जा सकता है। फरवरी माह से स्कूलों में पढ़ाई शुरू हो गई है और मई माह आधा बीत जाने के बाद भी स्कूलों में किताबें नहीं पहुंची हैं। किताबों की कमी के चलते अध्यापकों को इस वर्ष छठी और सातवीं कक्षा पास कर चुके विद्यार्थियों से उनकी पुरानी किताबें मांग कर पढ़ाना पढ़ रहा है।
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रिएलिटी चेक
शहर के कुछ मुख्य स्कूलों समेत आसपास के स्कूलों से सूचना थी कि मुफ्त में दी जाने वाली किताबें स्कूलों तक नही पहुंची हैं। दोपहर 12 बजे शिक्षा अधिकारियों से संपर्क किया गया। आला अधिकारी के मोबाइल नंबर पर बात की गई। बताया कि छठी से आठवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली मुफ्त किताबें सभी स्कूलों में वितरित कर दी हैं। कहा कि जिस अधिकारी को किताबें बांटने का जिम्मा दिया है, वह उनके साथ ही मौजूद है। इसी दौरान साथ चल रहे अधिकारी ने उपनिदेशक से कहा कि किताबें वितरित हो चुकी हैं। इसके बाद उपनिदेशक ने कहा कि किताबें स्कूलों में पहुंच चुकी हैं, संबंधित अधिकारी इसकी पुष्टि कर रहे हैं।
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हैरत : हमारे स्कूलों में तो नहीं पहुंची किताबें
दोपहर 12:10 बजे के बाद सोलन तथा इसके आस पास के कुछ स्कूलों में अधिकारियों की मुफ्त किताबें पहुंचाने की दलील को पुख्ता करने के लिए क्रास चेक किया गया। ब्वायज स्कूल सोलन, गर्ल्स स्कूल सोलन, शमरोड़ स्कूल नौणी, कंडाघाट, गुग्गाघाट, दयोठी, धारो की धार नौणी, कसौली, आंजी और सुबाथू जैसे विभिन्न स्कूलों में संपर्क किया गया। सूचना मिली कि छठीं और सातवीं कक्षा की  किताबों के पूरे सेट उन्हें अभी तक नहीं मिले हैं। कुछ स्कूलों में छठी में केवल हिंदी व्याकरण और सातवीं में केवल संस्कृत की किताब ही मिल पाई हैं।

यह तो बोल रहे किताबें मिली नहीं, मचा हड़कंप
दोपहर करीब एक बजे शिक्षा अधिकारियों को फोन पर वास्तुथिति से अवगत करवाया गया। चंद देरी के बाद हड़कंप मच गया। स्कूलों में किताबें जल्द उठाने के लिए फोन की घंटियां घनघनाने लगीं। कुछ स्कूलों में दोबारा क्रास चेक किया तो सूचना मिली कि शिक्षा विभाग से जल्द मुफ्त किताबें उठाने के लिए दनादन फोन बज रहे हैं। कुछ स्कूल प्रबंधन ने तो किताबें लाने के लिए कर्मचारी भेज दिए।

फिर दी यह सफाई
दोपहर 12.59 बजे एक बार फिर शिक्षा अधिकारियों को फोन किए गए। साथ ही स्कूलों द्वारा किताबें नहीं मिलने की जानकारी दी। उधर, एलिमेंटरी शिक्षा उपनिदेशक डॉ. चंद्रेशवर शर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि स्कूलों द्वारा जो किताबें ली जा रही हैं, वह सप्लिमेंट्री डिमांड वाली है। एडमिशन अधिक होने पर अतिरिक्त किताबें दी जा रही हैं।

यह है बुक डिपो का नजारा
फोन पर क्रासचेक के दौरान ‘अमर उजाला’ ने बुक डिपो का दौरा किया। कायलर सपरूण सड़क के किनारे दो मंजिला भवन में सबसे नीचे किताबों की लाइनें लगी थीं। आलम यह था कि किताबें दरवाजे के बाहर तक रखी हुई थी। अंदर पूरा स्टोर किताबों से भरा पड़ा था। कर्मचारी किताबों को लगाने में जुटे थे। एक कर्मचारी ने अंदर जाने से रोका। फोटो खिंचने से भी मना किया। कहा कि यहां आप फोटो नहीं खींच सकते

बातचीत के दौरान पूछा कि किताबें कब आई हैं। जवाब मिला की जनवरी से किताबें आना शुरू हो गई हैं। पूछा कि अभी तक स्कूलों में किताबें पहुंची क्यों नहीं? जवाब मिला कि जिन स्कूलों से डिमांड थी, वहां किताबें पहुंचा दी हैं। कई स्कूलों में किताबें क्यों नहीं पहुंची हैं, जवाब मिला यह शिक्षा विभाग या स्कूल प्रबंधन जाने?

आखिर किसकी नाकामी
बोर्ड से जिला के मुख्य डिपुओं में भेजी किताबें पहुंच तो गई हैं लेकिन स्कूलों और ब्लॉकों में नहीं पहुंचाई जा रही। इसे बोर्ड की लेटलतीफी कहें या फिर जिला में शिक्षा विभागीय पदाधिकारियों की नाकामियां, स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचाई गई हैं। उधर विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि किताबें पहुंच गई है। सेट बनाने में कुछ समय लग जाता है। किताबें भेजी जा रही है।

21600 विद्यार्थियों होते हैं लाभान्वित
जिला में छठी से आठवीं के 309 स्कूल हैं। इनमें लगभग 21600 विद्यार्थियों को निशुल्क किताबें मुहैया करवाई जाती हैं। विद्यार्थियों को किताबों का इंतजार है। लेकिन शिक्षा विभाग का यह इंतजार लंबा बनता जा रहा है। इससे जहां विद्यार्थी परेशान है। वहीं अध्यापक भी विभाग को कोस रहे हैं।


मामले की होगी जांच: डीसी
डीसी डॉ. राकेश कंवर ने कहा कि यह मामला गंभीर है। इसकी जांच की जाएगी। अगर किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही समने आई तो उनपर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोताही शर्मानाक है। शिक्षा बोर्ड या शिक्षा विभाग के अधिकारियों से इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी जाएगी।

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