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Solan News: वरिष्ठ नागरिकों को कानूनी अधिकारों की दी जानकारी
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धर्मपुर पंचायत में विधिक विभाग ने लगाया जागरूकता शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। धर्मपुर पंचायत में न्यायिक विधिक विभाग की ओर से वरिष्ठ नागरिकों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविर लगाया गया। शिविर में कसौली कोर्ट की महिला अधिवक्ता दीपाली धरोच और अंकिता चौधरी ने वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और योजनाओं की जानकारी दी।
अधिवक्ता दीपाली धरोच ने भरण-पोषण के कानूनी ढांचे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय कानून में आश्रितों, विशेषकर पत्नी, बच्चों और वृद्ध माता-पिता के जीवनयापन की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम 1956 की धारा 18 के तहत पत्नी पति से भरण-पोषण का दावा कर सकती है। वहीं धारा 20 के तहत वृद्ध माता-पिता व बच्चों के अधिकारों एवं उनके निवास के अधिकार को सुरक्षित किया गया है। उन्होंने संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक तक कानून की पहुंच सुलभ बनाए, ताकि कोई भी व्यक्ति गरीबी या अक्षमता के कारण अपने कानूनी अधिकारों से वंचित न रहे। वहीं, अधिवक्ता अंकिता चौधरी ने राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर गठित नालसा और स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये संस्थाएं आम नागरिकों को मुफ्त और सुलभ कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाती हैं। कार्यक्रम के दौरान पंचायत प्रधान महेश गुप्ता, उपप्रधान सुशील शर्मा, पैरा लीगल वॉलंटियर मेघा शर्मा, कोर्ट कर्मचारी गोविंद सिंह, वरिष्ठ नागरिक मनमोहन सिंह, लीला दत्त, परमानंद, होशियार सिंह, विनोद, सुभाष सहित अन्य उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। धर्मपुर पंचायत में न्यायिक विधिक विभाग की ओर से वरिष्ठ नागरिकों को अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता शिविर लगाया गया। शिविर में कसौली कोर्ट की महिला अधिवक्ता दीपाली धरोच और अंकिता चौधरी ने वरिष्ठ नागरिकों को उनके कानूनी अधिकारों और योजनाओं की जानकारी दी।
अधिवक्ता दीपाली धरोच ने भरण-पोषण के कानूनी ढांचे पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय कानून में आश्रितों, विशेषकर पत्नी, बच्चों और वृद्ध माता-पिता के जीवनयापन की सुरक्षा के लिए मजबूत प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम 1956 की धारा 18 के तहत पत्नी पति से भरण-पोषण का दावा कर सकती है। वहीं धारा 20 के तहत वृद्ध माता-पिता व बच्चों के अधिकारों एवं उनके निवास के अधिकार को सुरक्षित किया गया है। उन्होंने संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का यह दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक तक कानून की पहुंच सुलभ बनाए, ताकि कोई भी व्यक्ति गरीबी या अक्षमता के कारण अपने कानूनी अधिकारों से वंचित न रहे। वहीं, अधिवक्ता अंकिता चौधरी ने राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर गठित नालसा और स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये संस्थाएं आम नागरिकों को मुफ्त और सुलभ कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाती हैं। कार्यक्रम के दौरान पंचायत प्रधान महेश गुप्ता, उपप्रधान सुशील शर्मा, पैरा लीगल वॉलंटियर मेघा शर्मा, कोर्ट कर्मचारी गोविंद सिंह, वरिष्ठ नागरिक मनमोहन सिंह, लीला दत्त, परमानंद, होशियार सिंह, विनोद, सुभाष सहित अन्य उपस्थित रहे।
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