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बीबीएन में मक्की की फसल तबाह होने से आक्रोशित किसानों ने की नारेबाजी
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कालूझिंडा के शेरां में सुंडी रोग से फसल खराब होने पर खेतों में खड़े होकर प्रर्दशन करते किसान। संव
- फोटो : SOLAN
बद्दी (सोलन)। बरोटीवाला की कालूझिंडा पंचायत में मक्की की फसल को फाल आर्मी वर्म रोग लगने से किसानों की फसल लगभग तबाह हो चुकी है। किसानों ने अपने खेतों में खड़े होकर विभाग के प्रति नाराजगी व्यक्त कर नारेबाजी की और उचित मुआवजा देने की मांग उठाई।
कालूझिंडा के शेरां गांव के राजेश कुमार, संजू, रमेश, राजीव कुमार, प्यारा सिंह, बग्गा, रूपेश, देवेंद्र, रामलोक, लेखराम, मनोज, सुखराम, हरीश, सुरेश, जिया राम, राम प्रकाश और रतन का कहना है कि उनकी फसल फाल आर्मी वर्म (सूंडी) रोग से नष्ट हो गई। फसलों के मुआवजे के मामले में सरकार ऊपरी हिमाचल और निचले हिमाचल के लोगों के साथ दोहरा मापदंड अपनाती है।
ऊपरी हिमाचल में अगर सेब या अन्य किसी फसल को थोड़ा भी नुकसान होता है तो सरकार उनके लिए मुआवजे की घोषणा कर देती है। वहीं, निचले हिमाचल में जब किसानों की मुख्य फसल मक्की, धान और गेहूं में रोग लगता है तो उसकी अनदेखी करती है।
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पिछले लगभग 15 दिनों से मक्की की फसल किसी खतरनाक कीड़े ने लगभग तबाह कर दी। महंगे बीज और कीटनाशक दवाई डालने के बावजूद रोग मक्की की फसल को छोड़ नहीं रहा है। वर्म ने किसानों के खेत ही उजाड़ दिए हैं।
कृषि प्रसार अधिकारी राजेश वर्मा का कहना है कि कालूझिंडा और आसपास की पंचायतों के किसानों को इस रोग से राहत दिलाने के लिए 30 लीटर साइपर मिथेन कीटनाशक दवा भेजी गई है। किसान इस दवा का रोग ग्रस्त फसल पर छिड़काव करें।
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कालूझिंडा के शेरां गांव के राजेश कुमार, संजू, रमेश, राजीव कुमार, प्यारा सिंह, बग्गा, रूपेश, देवेंद्र, रामलोक, लेखराम, मनोज, सुखराम, हरीश, सुरेश, जिया राम, राम प्रकाश और रतन का कहना है कि उनकी फसल फाल आर्मी वर्म (सूंडी) रोग से नष्ट हो गई। फसलों के मुआवजे के मामले में सरकार ऊपरी हिमाचल और निचले हिमाचल के लोगों के साथ दोहरा मापदंड अपनाती है।
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ऊपरी हिमाचल में अगर सेब या अन्य किसी फसल को थोड़ा भी नुकसान होता है तो सरकार उनके लिए मुआवजे की घोषणा कर देती है। वहीं, निचले हिमाचल में जब किसानों की मुख्य फसल मक्की, धान और गेहूं में रोग लगता है तो उसकी अनदेखी करती है।
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पिछले लगभग 15 दिनों से मक्की की फसल किसी खतरनाक कीड़े ने लगभग तबाह कर दी। महंगे बीज और कीटनाशक दवाई डालने के बावजूद रोग मक्की की फसल को छोड़ नहीं रहा है। वर्म ने किसानों के खेत ही उजाड़ दिए हैं।
कृषि प्रसार अधिकारी राजेश वर्मा का कहना है कि कालूझिंडा और आसपास की पंचायतों के किसानों को इस रोग से राहत दिलाने के लिए 30 लीटर साइपर मिथेन कीटनाशक दवा भेजी गई है। किसान इस दवा का रोग ग्रस्त फसल पर छिड़काव करें।