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प्रसिद्ध जोहड़ जी मेला दो अप्रैल से
Solan
Updated Mon, 24 Mar 2014 05:32 AM IST
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कसौली (सोलन)। कसौली के पट्टा महलोग का प्रसिद्ध जोहड़ जी मेला दो अप्रैल से शुरू हो रहा है। करीब 500 वर्षों के चला आ रहा यह मेला हिंदू-सिख एकता का प्रतीक है। मेले में हिमाचल सहित पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ समेत कई राज्यों से श्रद्धालु गुरुद्वारे में शीश नवाने पहुंचते हैं। मेले का समापन 14 अप्रैल को होगा।
मान्यता है कि 15वीं शताब्दी में जोहड़ जी स्थान पर कौड़ा नामक नरभक्षी राक्षस रहता था। उसने पूरे क्षेत्र में आतंक मचा रखा था। एक बार गुरु नानक देव के दोनों शिष्य बाला और मरदाना यहां टहल रहे थे, तो मरदाना को कौड़ा ने पकड़ लिया। मरदाना ने भय से नानक देव को याद किया तो वह प्रगट हो गए। गुरु नानक देव ने उसे गर्म तेल के कड़ाहे में गिराकर उसका अंत कर दिया। तबसे यह मेला गुरु नानक देव की फतेह में हर तीसरे वर्ष मनाया जाता है।
इस स्थान पर बाबा गंगदास, बाबा खड़क सिंह और बाबा जवाहर सिंह ने भी तप किया है। यहां स्थित जोहड़ की विशेषता है कि यह ऊंची चोटी पर होने के बावजूद कभी नहीं सूखता। इसी स्थान पर एक छोटी सी गुफा है, जिसे स्वर्गद्वारी भी कहा जाता है। इस गुफा में से सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह घोड़े समेत निकल गए थे। श्रद्धालुओं के लिए नालागढ़ से परिवहन निगम की सीधी बस सेवा उपलब्ध रहती है। मेले के दौरान नालागढ़, रोपड़, चंडीगढ़ और कालका से विशेष बसें भी लगी होती हैं।
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मान्यता है कि 15वीं शताब्दी में जोहड़ जी स्थान पर कौड़ा नामक नरभक्षी राक्षस रहता था। उसने पूरे क्षेत्र में आतंक मचा रखा था। एक बार गुरु नानक देव के दोनों शिष्य बाला और मरदाना यहां टहल रहे थे, तो मरदाना को कौड़ा ने पकड़ लिया। मरदाना ने भय से नानक देव को याद किया तो वह प्रगट हो गए। गुरु नानक देव ने उसे गर्म तेल के कड़ाहे में गिराकर उसका अंत कर दिया। तबसे यह मेला गुरु नानक देव की फतेह में हर तीसरे वर्ष मनाया जाता है।
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इस स्थान पर बाबा गंगदास, बाबा खड़क सिंह और बाबा जवाहर सिंह ने भी तप किया है। यहां स्थित जोहड़ की विशेषता है कि यह ऊंची चोटी पर होने के बावजूद कभी नहीं सूखता। इसी स्थान पर एक छोटी सी गुफा है, जिसे स्वर्गद्वारी भी कहा जाता है। इस गुफा में से सिक्खों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह घोड़े समेत निकल गए थे। श्रद्धालुओं के लिए नालागढ़ से परिवहन निगम की सीधी बस सेवा उपलब्ध रहती है। मेले के दौरान नालागढ़, रोपड़, चंडीगढ़ और कालका से विशेष बसें भी लगी होती हैं।
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