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जीएसटी ने कम किए राज्य व केंद्र के अप्रत्यक्ष कर सिद्धू
Updated Wed, 04 Jul 2018 05:56 PM IST
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जीएसटी ने कम किए राज्य-केंद्र के अप्रत्यक्ष कर : सिद्धू
बद्दी में कार्यशाला, जीएसटी परिषद ने एक साल में प्रमुख मुद्दे किए हल : कमिश्नर
जीएसटी एक साल और आगे बढ़ने का मार्ग पर विशेषज्ञों ने दी राय
अमर उजाला ब्यूरो
बद्दी (सोलन)। हिमाचल में सीआईआई के राज्य परिषद चेयरमैन आईएमजेएस सिद्धू ने कहा कि जीएसटी ने राज्य और केंद्र के कई अप्रत्यक्ष करों को कम कर दिया है। क्रेडिट अवरोध को घटाया है। देश भर में एक कॉमन बाजार बन चुका है और अप्रत्यक्ष कर कानून और दरों में समानता आई है। उन्होंने कहा कि टैक्स स्लैब तर्कसंगत, रिटर्न दाखिल करने में सरलीकरण, अधिक डाटा विश्लेषण जैसी कुछ चुनौतियां हैं लेकिन इन्हें सभी हितधारकों के सहयोगी दृष्टिकोण से जल्द हल कर लिया जाएगा। सिद्धू बद्दी में ‘वन ईयर ऑफ जीएसटी एंड द वे फारवर्ड’ विषय पर सत्र में बोल रहे थे। इस सत्र का आयोजन सीआईआई ने सीजीएसटी कमिश्नरेट शिमला और चंडीगढ़ के साथ मिलकर किया था। इस मौके पर सीजीएसटी आयुक्तालय चंडीगढ़ के आयुक्त किशोरी लाल ने कहा कि शुरूआती हिचकिचाहट के बावजूद कर सुधार को हितधारकों से भारी समर्थन मिला है। जीएसटी परिषद के रूप में गठित समर्थन तंत्र ने एक साल में 27 बैठकों में प्रमुख मुद्दों को हल कर दिया जबकि सीजीएसटी कमिश्नरेट शिमला के कमिश्नर एचबी नेगी ने कहा कि जीएसटी और निर्बाध कामकाज व रोल आउट के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को यूरोपीय संघ ने भी सराहा है। यह इसमें विशेषज्ञता और समर्पण के बारे में बताता है। उन्होंने कहा कि नए सिस्टम की अनुकूलता प्राप्त अनुपालन अभिलेखों से स्पष्ट है जिसे और मजबूत करने के लिए विभाग ने बिना शर्त समर्थन का उद्योगों को आश्वासन दिया है। इस सत्र में बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ उद्योग बिरादरी के 60 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर सीए केशव गर्ग, सीआईआई एचपी राज्य परिषद के पूर्व अध्यक्ष संजय खुराना, सीए आलोक कृष्ण और सीए सिंगला समेत कई अन्य मौजूद रहे।
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बद्दी में कार्यशाला, जीएसटी परिषद ने एक साल में प्रमुख मुद्दे किए हल : कमिश्नर
जीएसटी एक साल और आगे बढ़ने का मार्ग पर विशेषज्ञों ने दी राय
अमर उजाला ब्यूरो
बद्दी (सोलन)। हिमाचल में सीआईआई के राज्य परिषद चेयरमैन आईएमजेएस सिद्धू ने कहा कि जीएसटी ने राज्य और केंद्र के कई अप्रत्यक्ष करों को कम कर दिया है। क्रेडिट अवरोध को घटाया है। देश भर में एक कॉमन बाजार बन चुका है और अप्रत्यक्ष कर कानून और दरों में समानता आई है। उन्होंने कहा कि टैक्स स्लैब तर्कसंगत, रिटर्न दाखिल करने में सरलीकरण, अधिक डाटा विश्लेषण जैसी कुछ चुनौतियां हैं लेकिन इन्हें सभी हितधारकों के सहयोगी दृष्टिकोण से जल्द हल कर लिया जाएगा। सिद्धू बद्दी में ‘वन ईयर ऑफ जीएसटी एंड द वे फारवर्ड’ विषय पर सत्र में बोल रहे थे। इस सत्र का आयोजन सीआईआई ने सीजीएसटी कमिश्नरेट शिमला और चंडीगढ़ के साथ मिलकर किया था। इस मौके पर सीजीएसटी आयुक्तालय चंडीगढ़ के आयुक्त किशोरी लाल ने कहा कि शुरूआती हिचकिचाहट के बावजूद कर सुधार को हितधारकों से भारी समर्थन मिला है। जीएसटी परिषद के रूप में गठित समर्थन तंत्र ने एक साल में 27 बैठकों में प्रमुख मुद्दों को हल कर दिया जबकि सीजीएसटी कमिश्नरेट शिमला के कमिश्नर एचबी नेगी ने कहा कि जीएसटी और निर्बाध कामकाज व रोल आउट के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को यूरोपीय संघ ने भी सराहा है। यह इसमें विशेषज्ञता और समर्पण के बारे में बताता है। उन्होंने कहा कि नए सिस्टम की अनुकूलता प्राप्त अनुपालन अभिलेखों से स्पष्ट है जिसे और मजबूत करने के लिए विभाग ने बिना शर्त समर्थन का उद्योगों को आश्वासन दिया है। इस सत्र में बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ उद्योग बिरादरी के 60 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर सीए केशव गर्ग, सीआईआई एचपी राज्य परिषद के पूर्व अध्यक्ष संजय खुराना, सीए आलोक कृष्ण और सीए सिंगला समेत कई अन्य मौजूद रहे।