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चायल में वैद्य रामकृष्ण बन रहे कैंसर पीडित मरीजों के मसीहा
Updated Sun, 11 Mar 2018 10:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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चायल (सोलन)।
चायल-कंडाघाट मार्ग पर बाबे का मोड़ के नाम से विख्यात स्थान पर पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार से हर रविवार को कैंसर समेत कई बीमारियों के उपचार करवाने के लिए सैकड़ों लोगों का जमावड़ा लगा रहता है।
वैद्य रामकृष्ण का दावा है कि वो जंगली जड़ी-बूटियों से कैंसर का इलाज करते हैं। पटियाला के राजा भूपेंद्र के जमाने में उनके वैद्य स्व. जीत राम हजारों लोगों को कैंसर जैसे जानलेवा रोग से इलाज किया करते थे। उनकी मौत के बाद उनके पौत्र रामकृष्ण सप्ताह के छह दिन जंगलों में जड़ी-बुटियां इकट्ठी कर उन्हें रात भर कड़ी मेहनत कर पीसते हैं। इसके बाद हर रविवार को वह कैंसर के मरीजों का मुफ्त उपचार करते हैं। रामकृष्ण वैद्य जिस जगह पर कैंसर होता है वहां पर लेप लगाते हैं। उनका दावा हे कि वो हजारों मरीजों को ठीक कर चुके हैं।
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बड़ी बात हे कि वो इलाज के लिए कोई पैसा नहीं लेते। उत्तर प्रदेश से आए कैंसर के मरीज राम प्रसाद यादव ने बताया कि वे दवा के बाद धीरे-धीरे गले के कैंसर से निजात पा रहे हैं। पंजाब के पटियाला के गुरनाम सिंह, चंडीगढ़ के हरनाम सिंह, बिहार के पप्पू सिंह समेत यहां अलग-अलग राज्यों से कैंसर के मरीज जिंदगी की आस लिए पहुंचे हैं। मरीजों ने बताया कि वद्य रामकृष्ण की जड़ी-बूटियों से निर्मित लेप को लगाकर उन्हें राहत मिल रही है।
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