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परीक्षाओं के मनोवैज्ञानिक डर से खुद को दूर रखें बच्चे
Updated Wed, 06 Dec 2017 09:52 PM IST
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समयसारिणी बनाकर करें पढ़ाई, कुनिहार में आयोजित शिविर में वक्ताओं ने दिए परीक्षाओं की तैयारी करने के टिप्स
बोझ समझने के बजाय चिंता मुक्त होकर करें पढ़ाई
अक्षरेश शर्मा
कुनिहार (सोलन)।
परीक्षाओं को लेकर बच्चे तैयारी का ध्यान रखें उसे बोझ न समझे। परीक्षाओं को बोझ समझेंगे तो मन में डर पैदा होगा। डर के कारण पढ़ाई सही ढंग से नहीं होगी। यह जानकारी परीक्षाओं को लेकर कुनिहार में आयोजित शिविर में वक्ताओं ने दी। अध्यापकों ने कहा कि बच्चे चिंता मुक्त होकर पढ़ाई करें। इसके लिए सबसे जरूरी है कि वह समय के हिसाब से तैयारी करें। पढ़ाई के लिए अपना एक टाइमटेबल बनाएं, फिर उसी के अनुरूप परीक्षाओं की तैयारी करें। वक्ताओं ने कहा कि परीक्षाओं को लेकर बेवजह चिंतित होंगे तो पढ़ाई नहीं होगी। चिंता करने के बजाय किताबों को अधिक समय दें।
शिविर में जिला हमीरपुर के राजेश्वरी शिक्षा महाविद्यालय भोटा के प्रधानाचार्य डॉ. राज कुमार धीमान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक डर परीक्षा की सफलता पर गहरा प्रभाव डालता है। इसलिए परीक्षा से पहले संबंधित विषय का भली प्रकार से अध्ययन करना चाहिए। इसके अलावा बच्चे परीक्षा के प्रति चिंतित रहते हैं जो उनकी सफलता पर कुप्रभाव डालते हैं। विशेष तौर पर परीक्षा के दिनों में बच्चों को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। समय पर हाथ धोकर भोजन करना चाहिए, अभिभावकों को भी इन दिनों में बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चे घर जाकर विषय को अच्छी तरह से दोहरा सकें। उन्होंने कहा परीक्षा के अंतिम दिनों में बच्चों को किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव में नहीं रखना होता है, बल्कि उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के अध्यापक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि परीक्षा ही बच्चों की प्रतिभा को दिखाने का माध्यम होती हैं। इस मौके पर मुख्याध्यापक राजेंद्र कुमार, सुमन, अशोक कुमार और अन्य विद्यार्थी मौजूद रहे।
बच्चों के खानपान का रखें विशेष ध्यान : डॉ. नागेश
डॉ. नागेश कुमार गर्ग ने कहा कि परीक्षाओं के दौरान बच्चों के खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को जंक फूड न दें न ही तली हुई चीजें खिलाएं। इसके साथ बच्चों को नींद भी पूरी होनी चाहिए। कम से कम छह घंटे बच्चों को नींद लेना जरूरी है। घर का माहौल खुशनुमा रखें तथा बच्चों के साथ प्यार से बात करें ताकि वह किसी तरह का चिंता अपने मन में न रखें। पढ़ाई करने के लिए उन्हें धमकाने के बजाय प्यार से समझाएं।
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बोझ समझने के बजाय चिंता मुक्त होकर करें पढ़ाई
अक्षरेश शर्मा
कुनिहार (सोलन)।
परीक्षाओं को लेकर बच्चे तैयारी का ध्यान रखें उसे बोझ न समझे। परीक्षाओं को बोझ समझेंगे तो मन में डर पैदा होगा। डर के कारण पढ़ाई सही ढंग से नहीं होगी। यह जानकारी परीक्षाओं को लेकर कुनिहार में आयोजित शिविर में वक्ताओं ने दी। अध्यापकों ने कहा कि बच्चे चिंता मुक्त होकर पढ़ाई करें। इसके लिए सबसे जरूरी है कि वह समय के हिसाब से तैयारी करें। पढ़ाई के लिए अपना एक टाइमटेबल बनाएं, फिर उसी के अनुरूप परीक्षाओं की तैयारी करें। वक्ताओं ने कहा कि परीक्षाओं को लेकर बेवजह चिंतित होंगे तो पढ़ाई नहीं होगी। चिंता करने के बजाय किताबों को अधिक समय दें।
शिविर में जिला हमीरपुर के राजेश्वरी शिक्षा महाविद्यालय भोटा के प्रधानाचार्य डॉ. राज कुमार धीमान ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिक डर परीक्षा की सफलता पर गहरा प्रभाव डालता है। इसलिए परीक्षा से पहले संबंधित विषय का भली प्रकार से अध्ययन करना चाहिए। इसके अलावा बच्चे परीक्षा के प्रति चिंतित रहते हैं जो उनकी सफलता पर कुप्रभाव डालते हैं। विशेष तौर पर परीक्षा के दिनों में बच्चों को अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। समय पर हाथ धोकर भोजन करना चाहिए, अभिभावकों को भी इन दिनों में बच्चों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि बच्चे घर जाकर विषय को अच्छी तरह से दोहरा सकें। उन्होंने कहा परीक्षा के अंतिम दिनों में बच्चों को किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव में नहीं रखना होता है, बल्कि उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के अध्यापक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि परीक्षा ही बच्चों की प्रतिभा को दिखाने का माध्यम होती हैं। इस मौके पर मुख्याध्यापक राजेंद्र कुमार, सुमन, अशोक कुमार और अन्य विद्यार्थी मौजूद रहे।
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बच्चों के खानपान का रखें विशेष ध्यान : डॉ. नागेश
डॉ. नागेश कुमार गर्ग ने कहा कि परीक्षाओं के दौरान बच्चों के खानपान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को जंक फूड न दें न ही तली हुई चीजें खिलाएं। इसके साथ बच्चों को नींद भी पूरी होनी चाहिए। कम से कम छह घंटे बच्चों को नींद लेना जरूरी है। घर का माहौल खुशनुमा रखें तथा बच्चों के साथ प्यार से बात करें ताकि वह किसी तरह का चिंता अपने मन में न रखें। पढ़ाई करने के लिए उन्हें धमकाने के बजाय प्यार से समझाएं।
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