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एफसीए क्लेरेंस में फंसा फोरलेन प्रोजेक्ट का दूसरा चरण, नहीं मिल रही डंपिंग साइट की इजाजत

Mon, 17 Dec 2018 07:27 PM IST
pravinder guleria pravinder guleria
Updated Mon, 17 Dec 2018 07:27 PM IST
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राकेश शर्मा
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सोलन। बेहद आधुनिक तकनीक पर तैयार होने जा रहे चंबाघाट-कैथलीघाट फोरलेन नेशनल हाईवे के दूसरे चरण में फॉरेस्ट क्लीयरेंस का पेंच फंस गया है। नेशनल हाईवे पर करीब 25 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में अभी तक डंपिंग साइट चिह्नित नहीं हो पाई हैं। कंपनी ने करीब 19 डंपिंग साइट का आवेदन एनएचएआई प्रबंधन के माध्यम से फोरेस्ट क्लीयरेंस को भेजा है। चंबाघाट और कंडाघाट के बीच डेढ़घराट में कंपनी काम छेड़ चुकी है जहां से रोजाना सैकड़ों टन मलबा निकल रहा है। इस मलबे को शुरूआत में कंपनी निजी भूमि पर ठिकाने लगा रही थी। लेकिन जिस साइट को कंपनी प्रबंधन ने किराये पर लिया है, वह पूरी तरह भर चुकी है। अब मलबे की परतें मुख्य सड़क तक आ रही हैं। इस वजह से आवाजाही कर रहे वाहनों को जाम का सामना करना पड़ रहा है। क्रिसमस व नए साल का सीजन होने की वजह से भारी संख्या में पर्यटक मार्ग पर आवाजाही कर रहे हैं। मार्ग पर मलबे के ढेर होने से उन्हें परेशानी हो रही है।
फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई प्रबंधन वन विभाग के निर्देश पर डंपिंग साइट चिह्नित करता है। इन साइटों में मलबा फेंकने की इजाजत रहती है। निर्माता कंपनी प्रबंधन को साइट विकसित करने की एवज में डंपिंग की इजाजत मिलती है। उन्हें डंगे लगाने और पेड़-पौधे लगाकर भविष्य में भूस्खलन को रोकने की शर्त जोड़ी गई है। चंबाघाट-कैथलीघाट फोरलेन निर्माण के इस चरण में अभी तक एनएचएआई प्रबंधन डंपिंग साइट की तय नहीं कर पाया है। इस वजह से निर्माता कंपनी ऐरिफ इंजीनियरिंग का काम शुरूआत में ही फंस गया है। करीब 25 किलोमीटर के इस हिस्से का काम कंपनी को निर्धारित ढाई साल की अवधि में पूरा करना है।
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ऐरिफ इंजीनियरिंग कंपनी प्रवक्ता का कहना है कि उन्होंने निजी भूमि को किराये पर लेकर मलबा फेंका है लेकिन भूमि कम पड़ रही है। इस वजह से कंपनी को तत्काल चिह्नित डंपिंग साइटों की जरूरत है जिससे मलबा फेंका जा सके और यातायात पर कोई असर न पड़े।
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पर्यटक कर रहे जाम की समस्या का सामना
चंबाघाट-कंडाघाट के बीच डंपिंग साइट भर जाने से नियमित रूप से जाम लग रहा है। इसके चलते पर्यटकों और अन्य लोगों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है। व्हाइट क्रिसमस की आस में शिमला पहुंचने वाले पर्यटक कालका से चंबाघाट तक फोरलेन निर्माण कार्य से आहत हो रहे हैं। पूर्व में सोलन से आगे का सफर आरामदायक था लेकिन फोरलेन का काम शुरू होने और डंपिंग साइट न मिलने से यहां जाम की समस्या बनी हुई है।
एफसीआई को भेजा है केस : वन विभाग
वन मंडल अधिकारी सोलन आरएस जंबाल का कहना है कि डंपिंग साइट को लेकर केस एफसीआई में भेजा गया है। क्लीयरेंस मिलते ही डंपिंग साइट चिह्नित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि एनएचएआई और कंपनी प्रबंधन संयुक्त रूप से एफसीए क्लीयरेंस के लिए आवेदन करते हैं। इस पर केंद्र से डंपिंग साइट की मंजूरी मिलती है। चंबाघाट-कैंथलीघाट के बीच डंपिंग साइट के लिए आवेदन हो चुका है लेकिन इसमें एक माह तक का समय भी लग सकता है।

जल्द ही तय हो जाएगी डंपिंग साइट : एनएचएआई प्रबंधन
एनएचएआई के प्रोजेक्ट निदेशक एके स्वामी का कहना है कि डंपिंग साइट को लेकर बातचीत चल रही है। जल्द ही साइट चिह्नित होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि एनएचएआई प्रबंधन भी जल्द से जल्द साइट तय करने के हक में है। उन्होंने कहा कि निर्माता कंपनी मनमर्जी से कहीं भी मलबा नहीं गिरा सकती है।
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