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यूरिया से बढ़ेगी सेब की पैदावार
Updated Wed, 07 Mar 2018 10:12 PM IST
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सोलन। लाल रसीले सेब की पैदावार बढ़ाने के लिए अब बागवानों को कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। बागवान सेब की पैदावार बढ़ाने के लिए इसकी जगह यूरिया खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे यहां सेब की फसल होगी वहीं मिट्टी को भी कोई नुकसान नहीं होगा। यह दावा है कि डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिकों का।
बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को कैन खाद, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट न मिलने पर सस्ते और टिकाऊ माध्यम से पैदावार बढ़ाने की सलाह दी है। इसके लिए उन्होंने सबसे बढ़िया विकल्प यूरिया को बताया है। इसके न तो कोई दुष्प्रभाव हैं और न ही इससे मृदा स्वास्थ्य में कोई हानि होती है। कुछ सालों से बागवानों को सेब के लिए कैन खाद, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट नहीं मिल रही। अधिकतर जगह इसका उत्पादन बंद हो चुका है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया का प्रयोग कर सेबों की फसल को बढ़िया ढंग से उगाया जा सकता है। नौणी विवि के मृदा विज्ञान एवं जल प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जेसी शर्मा ने बताया कि कुछ बागवानों द्वारा कैल्शियम नाइट्रेट में नत्रजन की मात्रा केवल 15.5 प्रतिशत इस्तेमाल की जाती है। यह कैन और यूरिया की तुलना में काफी कम है। सेब में नत्रजन की पूर्ति के लिए लगभग 4.5 किलोग्राम खाद प्रति पेड़ की दर से डालनी पड़ सकती हैं। यह एक महंगा विकल्प है। यह एक घुलनशील खाद है। इसका अधिकतर उपयोग पॉलीहाउस तथा फर्टिगेशन में ही किया जाता है।
ऐसे करें यूरिया का इस्तेमाल
बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक यूरिया खाद एक दस वर्ष और इससे ऊपर की आयु के फलदार पेड़ में डेढ़ किलो प्रयोग कर सकते हैं। यह मात्राएं दो हिस्सों में बराबर डाली जानी चाहिए। पहले 750 ग्राम यूरिया फूल आने के लगभग तीन हफ्ते पहले और 750 ग्राम फूल आने के एक महीने के बाद डालें। अक्तूबर और नवंबर में तौलियों में लगभग बारह सौ ग्राम बुझा हुआ चूना (मिटटी की आवश्यकता अनुसार) मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
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विवि ने किया है इस पर अनुसंधान : डॉ. शर्मा
नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. जेएन शर्मा ने बताया कि नौणी विवि द्वारा किए अनुसंधानों में यह पाया गया है कि कैन खाद के सस्ते विकल्प के रूप में यूरिया को उपयोग में लाया जा सकता है। इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। यह उपयुक्त मात्रा और विधि में प्रयोग करने पर मृदा स्वास्थ्य पर भी कोई विपरीत असर नहीं डालता।
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बागवानी विशेषज्ञों ने बागवानों को कैन खाद, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट न मिलने पर सस्ते और टिकाऊ माध्यम से पैदावार बढ़ाने की सलाह दी है। इसके लिए उन्होंने सबसे बढ़िया विकल्प यूरिया को बताया है। इसके न तो कोई दुष्प्रभाव हैं और न ही इससे मृदा स्वास्थ्य में कोई हानि होती है। कुछ सालों से बागवानों को सेब के लिए कैन खाद, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट नहीं मिल रही। अधिकतर जगह इसका उत्पादन बंद हो चुका है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि यूरिया का प्रयोग कर सेबों की फसल को बढ़िया ढंग से उगाया जा सकता है। नौणी विवि के मृदा विज्ञान एवं जल प्रबंधन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जेसी शर्मा ने बताया कि कुछ बागवानों द्वारा कैल्शियम नाइट्रेट में नत्रजन की मात्रा केवल 15.5 प्रतिशत इस्तेमाल की जाती है। यह कैन और यूरिया की तुलना में काफी कम है। सेब में नत्रजन की पूर्ति के लिए लगभग 4.5 किलोग्राम खाद प्रति पेड़ की दर से डालनी पड़ सकती हैं। यह एक महंगा विकल्प है। यह एक घुलनशील खाद है। इसका अधिकतर उपयोग पॉलीहाउस तथा फर्टिगेशन में ही किया जाता है।
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ऐसे करें यूरिया का इस्तेमाल
बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक यूरिया खाद एक दस वर्ष और इससे ऊपर की आयु के फलदार पेड़ में डेढ़ किलो प्रयोग कर सकते हैं। यह मात्राएं दो हिस्सों में बराबर डाली जानी चाहिए। पहले 750 ग्राम यूरिया फूल आने के लगभग तीन हफ्ते पहले और 750 ग्राम फूल आने के एक महीने के बाद डालें। अक्तूबर और नवंबर में तौलियों में लगभग बारह सौ ग्राम बुझा हुआ चूना (मिटटी की आवश्यकता अनुसार) मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें।
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विवि ने किया है इस पर अनुसंधान : डॉ. शर्मा
नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. जेएन शर्मा ने बताया कि नौणी विवि द्वारा किए अनुसंधानों में यह पाया गया है कि कैन खाद के सस्ते विकल्प के रूप में यूरिया को उपयोग में लाया जा सकता है। इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं। यह उपयुक्त मात्रा और विधि में प्रयोग करने पर मृदा स्वास्थ्य पर भी कोई विपरीत असर नहीं डालता।